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रियल एस्टेट संभावनाओं का आशियाना

रियल एस्टेट संभावनाओं का आशियाना

करियर के तौर पर रियल एस्टेट एक बड़ी संभावनाओं वाला क्षेत्र है। इसमें कुछ क्षेत्र तो स्पेशलाइजेशन की मांग करते हैं, पर बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं, जहां आपका सिर्फ ग्रेजुएट होना ही काफी है। यहां कैसे-कैसे करियर हैं, बता रहे हैं अशोक सिंह

रियल एस्टेट के क्षेत्र में करियर बनाने को आमतौर पर प्रॉपर्टी डीलर या कमीशन एजेंट्स के रूप में देखा जाता है, लेकिन यह रियल एस्टेट के पूरे फलक को प्रदर्शित नहीं करता। वर्तमान सन्दर्भ में यह क्षेत्र विविध प्रकार की करियर संभावनाओं को दर्शाता है। इसमें घर, ऑफिस, इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी और कॉरपोरेट फार्मलैंड की खरीद और बिक्री करने के अतिरिक्त प्रॉपर्टी प्रबंधन, भूमि विकास, बैंकों की मॉरगेज सर्विस, शहरी प्लानिंग, रियल एस्टेट काउंसलिंग, प्रॉपर्टी का मूल्य आकलन तथा रिसर्च इत्यादि शामिल हैं।

प्रबंधन और ब्रोकिंग से जुड़े कामों से लेकर फाइनेंस प्रबंधन तक में दक्ष लोगों की अहम भूमिका इस क्षेत्र में है। अभी आर्किटेक्ट, कंस्ट्रक्शन इंजीनियर, इंटीरियर डिजाइनर, सिक्योरिटी सिस्टम एक्सपर्ट्स जैसे प्रोफेशनलों की बढ़ती मांग की बात तो बाकी है। इतना ही नहीं मॉल्स, पावर प्लांट्स, पाइपलाइन, ब्रिज, सीवेज सिस्टम आदि सुविधाएं इन टाउनशिप के आसपास विकसित करने के लिए भी संबंधित एक्सपर्ट्स की बड़े पैमाने पर जरूरत पड़ती है।

रियल एस्टेट एनालिस्ट

कुछ समय से ब्रोकरेज हाउस और एडवाइजरी कंपनियों द्वारा रियल एस्टेट एनालिस्ट की सेवाएं बड़े पैमाने पर लेने का ट्रैंड देखने को मिला है। निवेश के लिए बेहतर लोकेशन, जमीन या अन्य प्रॉपर्टी के बारे में ये सूचनाएं और जानकारियां प्रदान करते हैं। और इस तरह की जानकारियों को ब्रोकरेज हाउस अपने बड़े क्लाइंट्स को देकर लाभ उठाते हैं। एमबीए अथवा एमए इकोनॉमिक्स के बाद इस प्रोफेशन में प्रवेश किया जा सकता है।

इंटरनेट पर उभरते रियल एस्टेट करियर

तमाम ऐसी वेबसाइट, पोर्टल्स, ब्लॉग्स, सोशल नेटवर्क, कम्युनिटी साइट्स आदि अब अस्तित्व में आ चुकी हैं, जिनके माध्यम से बड़ी आसानी से क्रेता और विक्रेता बिना किसी बिचौलिए के प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त कर सकते हैं। इससे न सिर्फ बड़े दायरे तक खरीद या बिक्री के विज्ञापनों को पहुंचाया जा सकता है, बल्कि कहीं ज्यादा रेट्स भी हासिल हो सकते हैं। इस तरह की वेबसाइट चलाने के लिए बैचलर्स डिग्री के अलावा कंप्यूटर और आईटी में पारंगत होना जरूरी है।

आर्किटेक्ट

बड़े से लेकर छोटे शहरों तक में प्राइवेट बिल्डर्स टाउनशिप बनाने की होड़ में लगे हुए हैं। इस प्रकार की टाउनशिप की रूपरेखा तैयार करने से लेकर फ्लैट्स अथवा मकानों के नक्शे बनाने का काम आर्किटेक्ट्स और टाउन प्लानर के जिम्मे होता है। ये लोग बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर डिग्री धारक होने के साथ इस क्षेत्र में काफी अनुभवी भी होते हैं।

कंस्ट्रक्शन या स्ट्रक्चरल इंजीनियर

बिल्डिंग एवं कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री के बढ़ते कामकाज से सिविल इंजीनियरों के लिए जॉब्स के अवसर तेजी से बढ़े हैं। इनमें खासतौर से कंस्ट्रक्शन और स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में स्पेशलिस्ट की मांग अपेक्षाकृत कहीं ज्यादा है। रियल एस्टेट के क्षेत्र में कार्यरत समस्त वर्क फोर्स का लगभग आधा भाग इसी तरह के एक्सपर्ट्स का है।

इंटीरियर डिजाइनर

बिल्डिंग तैयार होने के बाद रोल होता है इंटीरियर डिजाइनर का, जो विभिन्न जरूरतों के अनुसार इंटीरियर डेकोरेशन करते हैं। इसके बाद ही मकान, फ्लैट या कमर्शियल एस्टेब्लिशमेंट में निखार आता है। इस काम के लिए ट्रेंड इंटीरियर डेकोरेटर्स की सेवाएं बिल्डर्स और टाउनशिप डेवलपर्स द्वारा ली जाती हैं। यह कोर्स ग्रेजुएशन के बाद किया जा सकता है।

रियल एस्टेट एजेंट्स और ब्रोकर्स

मकानों और कॉमर्शियल प्रॉपर्टी की बढ़ती मांग के कारण रियल एस्टेट एजेंट्स की सेवाओं की जरूरत बढ़ने वाली है। महज ग्रेजुएट होने के बूते पर यह कार्यक्षेत्र आसानी से बिना किसी पूर्व ट्रेनिंग के चुना जा सकता है। हालांकि इस क्षेत्र में भी एमबीए (रियल एस्टेट मैनेजमेंट) सरीखी डिग्रियां अस्तित्व में आ चुकी हैं। इसमें भी स्पेशलाइजेशन के अवसर कुछ कम नहीं हैं, उदाहरण के लिए रेजिडेंशियल ब्रोकर, कमर्शियल ब्रोकर, इंडस्ट्रियल ब्रोकर, रियल एस्टेट काउंसलिंग आदि का नाम लिया जा सकता है।

अर्बन प्लानिंग

सरकारी एजेंसियों के साथ मिल कर ये एक्सपर्ट्स शहरों की भावी योजनाएं तैयार करते हैं और पुराने शहरों में बढ़ती आबादी के अनुरूप सुविधाओं के विकास और विस्तार में सहायता प्रदान करते हैं। इनके पास टाउन प्लानिंग या आर्किटेक्चर के अलावा अर्बन प्लानिंग की भी डिग्रियां हो सकती हैं।

फैक्ट फाइल

कोर्स

एमबीए,
एमबीए (रियल एस्टेट मैनेजमेंट),
बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर,
बीई (सिविल),
डिप्लोमा इन इंटीरियर डेकोरेशन,
बीए (एक्चुरियल साइंस),
बीए/ बीकॉम/ बीएससी,
सीए,
डिप्लोमा इन मार्केटिंग एंड सेल्स आदि।

संस्थान

सेंटर फॉर कॉन्टिन्यू एंड डिस्टेंस एजुकेशन, रायपुर 
एमिटी स्कूल ऑफ अर्बन मैनेजमेंट, नोएडा
कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी, मनसा गंगोत्री, कर्नाटक
इन्डियन इंस्टीट्यूट ऑफ रियल एस्टेट, पुणे
गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली
इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स, दिल्ली
स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, दिल्ली

योग्यता

कम से कम ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल करने के बाद ही इस प्रोफेशन में कदम रखने के बारे में सोचना चाहिए। रियल एस्टेट से संबंधित कोई खास प्रोफेशनल डिग्री होने पर तरक्की के अवसर ज्यादा हो सकते हैं। अच्छी कम्युनिकेशन स्किल के साथ काम के प्रति लगन का होना जरूरी है। इस क्षेत्र में इतने अधिक प्रोफेशन के लोगों की जरूरत पड़ती है कि आप अपनी दिलचस्पी के अनुसार कार्यक्षेत्र चुन सकते हैं।

एजुकेशन लोन

इस क्षेत्र से जुड़े अधिकांश प्रोफेशनल कोर्सेज के लिए बैंकों से लोन मिलने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। शॉर्ट डय़ूरेशन या प्राइवेट संस्थानों के कोर्सेज के लिए लोन प्राप्त करने में दिक्कत हो सकती है।

वेतन

रियल एस्टेट के प्रोफेशन में बिना किसी प्रोफेशनल योग्यता के शुरुआती वेतन 7 से 10 हजार के बीच हो सकता है, लेकिन अनुभव और काम में परफेक्शन के अनुसार इसमें वृद्धि होती चली जाती है। रियल एस्टेट कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर से जनरल मैनेजर के पद तक पहुंचने में 20 साल तक का समय लग सकता है। वेतन भी इसी क्रम में 3.5 लाख सालाना से बढ़कर 75 लाख सालाना तक हो सकता है।

लाभ

बिना किसी प्रोफेशनल ट्रेनिंग के रियल एस्टेट के क्षेत्र में रोजगार संभव है।
बिना ज्यादा पूंजी के सेल्फ एम्प्लॉयमेंट की संभावना भी कम नहीं है।
आगामी तीन वर्षो में इस क्षेत्र में 5 लाख रोजगार के नए अवसर सृजित होने का अनुमान है।

हानि

बैंक द्वारा ब्याज दर बढ़ाए जाने से सस्ते होम लोन बंद होने की स्थिति में इस क्षेत्र की प्रगति बाधित हो सकती है।

एक्सपर्ट व्यू

प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ेगी
बीएन रॉय, एडिशनल वाइस प्रेसिडेंट (कॉन्ट्रेक्ट), पार्श्वनाथ डेवलपर्स
 

आने वाले समय में मकानों और कमर्शियल इस्टेब्लिशमेंट की मांग तेजी से बढ़ेगी, जिसके कारण रियल एस्टेट के क्षेत्र से जुड़े प्रोफेशनल्स के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। बीएन रॉय का यह भी मानना है कि सिर्फ सिविल इंजीनियर्स या कंस्ट्रक्शन से संबंधित जॉब्स ही नहीं, बल्कि आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित मकानों और घरों के मुताबिक अन्य तमाम प्रोफेशन के लोगों की मांग में भी तेजी आएगी। इनमें इलेक्ट्रिकल, आईटी, सिक्योरिटी सिस्टम, ग्रीन बिल्डिंग के लिए एनवायरमेंट एक्सपर्ट्स, पावर बैकअप के लिए इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स, इंटीरियर डेकोरेटर्स आदि का विशेष तौर पर उल्लेख किया जा सकता है।

हालांकि उन्होंने इस बात पर दु:ख जताया कि एक समय में सिविल इंजीनियर्स की मांग बिलकुल समाप्त सी हो गयी थी और कई संस्थानों में तो इस शाखा की पढ़ाई भी बंद कर दी गयी, लेकिन आज सिविल इंजीनियर्स की कमी की स्थिति का सम्पूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर उद्योग सामना कर रहा है।

सक्सेस स्टोरी
धैर्य और लगन जरूरी है
विजेंद्र मित्तल,अध्यक्ष, कृष्णा अपरा समूह

देश के रियल एस्टेट बिजनेस में नाम कमाने वाली कंपनी कृष्णा अपरा समूह के अध्यक्ष विजेंद्र मित्तल का नाम उन गिने-चुने प्रोफेशनल और बिल्डर्स में शुमार किया जा सकता है, जिन्होंने बहुत कम समय में अपनी मेहनत के बूते पहचान बनायी है। एमए (पॉलिटिकल साइंस) की डिग्री हासिल करने के बाद 1980 में इन्होंने हरियाणा के हिसार क्षेत्र से कंस्ट्रक्शन बिजनेस की शुरुआत की थी।

इन्होंने अपना पहला प्रोजेक्ट ही एक टाउनशिप के रूप में प्रारंभ किया। कम बजट में आम लोगों को बेहतरीन घर देने का इनका दृढ़ संकल्प रंग लाया और 1996 तक इन्होंने कृष्णा अपरा के नाम से बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी की शुरुआत कर दिल्ली की ओर रुख किया। इसके बाद दिल्ली एनसीआर में बड़ी संख्या में हाउसिंग प्रोजेक्ट्स और अन्य कमर्शियल वेंचर्स इनके द्वारा तैयार किये गए। अब इनका कार्यक्षेत्र गुड़गांव तक फैल चुका है। इनका मानना है कि मेहनत, ईमानदारी और समाज के लिए कुछ कर दिखाने की लगन की बदौलत ही वे अपनी कंपनी को इस शिखर तक ला पाए हैं।

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