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ऑनर किलिंग पर हो फांसी: कोर्ट

सुप्रीमकोर्ट ने ऑनर किलिंग के मामलों को गंभीरता से लिया है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि ऑनर किलिंग के मामलों में दोषियों को फांसी की सजा देनी चाहिए। इन मामलों में सुप्रीम कोर्ट का यह अब तक का सबसे सख्त बयान है।

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों को निर्देश दिया कि ऐसे सभी मामलों को ‘रेयरस्ट अमंग द रेअर’ की श्रेणी में रखा जाए। कोर्ट ने कहा कि समय आ गया है कि जब इस बर्बरतापूर्ण और सामंती प्रथा को पूरी तरह से मिटा दिया जाए क्योंकि यह देश के माथे पर लगा हुआ एक बदनुमा दाग है।

कोर्ट ने कहा कि अगर ऑनर किलिंग के लिए मौत की सजा दी जाए तो इस तरह की प्रथा पर रोक लग सकती है। कोर्ट का कहना है कि जो लोग भी इस तरह की हत्याओं की योजना बना रहे हैं उनको पता चल जाना चाहिए कि फांसी का फंदा उनका इंतजार कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच में न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू व न्यायाधीश ज्ञान सुधा मिश्रा ने यह बातें एक अपील की सुनवाई के समय कीं। वे भगवान दास की अपील पर फैसला दे रहे थे।

अपील में भगवान दास ने ऑनर किलिंग के एक मामले में दिल्ली के सेशंस कोर्ट द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में अपील की थी। भगवान दास ने अपनी सगी बेटी को इसलिए मार डाला था क्योंकि शादीशुदा होने के बावजूद उसने पति को छोड़कर अपने ही चचेरे भाई के साथ शारीरिक संबंध बना रखे थे।

अभियोजन पक्ष ने कोर्ट से कहा कि भगवान दास अपनी बेटी से बेहद नाराज था। इसीलिए उसने 16 मई 2006 को बेटी का गला घोंटकर उसे मार डाला और शव को जलाने जा रहा था कि पुलिस ने उसे धर दबोचा। कोर्ट ने कहा कि कई जगहों पर इस तरह की हत्याएं हो रहीं हैं और ऑनर किलिंग में ऑनर जैसा कुछ भी नहीं। फैसले की कॉपी कोर्ट के कहने पर ही हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, डीजी पुलिस व निचली अदालतों को भेज दी गई है।

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