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फाइनेंशियल एनालिस्ट: बनें निवेश के एक्सपर्ट

फाइनेंशियल एनालिस्ट: बनें निवेश के एक्सपर्ट

पैसा कहां निवेश करें, आज यह सोचने का समय लोगों के पास कम है। फाइनेंशियल एनालिस्ट ऐसे लोगों व फर्मों को अपना पैसा निवेश करने में सहायता करते हैं।

‘फाइनेंशियल एनालिस्ट’ वे आर्थिक विशेषज्ञ हैं, जो अपने निवेशकर्त्ताओं को बताते हैं कि उन्हें किस क्षेत्र में अपना निवेश करना चाहिए। वे उस क्षेत्र का पूर्ण विश्लेषण कर ऐसी सलाह देते हैं, ताकि निवेश सुरक्षित भी हो व फलदायक भी। फाइनेंशियल एनालिस्ट की अकाउंटिंग, कैपिटल मार्केट तथा मार्केट स्ट्रेटेजी पर जबर्दस्त पकड़ होती है। इसी खूबी के बल पर ही वे अपने निवेशकर्त्ताओं को लाभकारी क्षेत्र बताते हैं। उदाहरणार्थ एक नॉलिज प्रोसेस आउटसोर्सिंग फर्म के लिए एक इक्विटी एनालिस्ट उद्योग विशेषज्ञों एवं उस उद्योग की नियंत्रक संस्थाओं से बातचीत करता है और मार्केट रिसर्च का निचोड़ अपने ग्रहकों को बताता है। इसी प्रकार फाइनेंशियल प्लानर अपने ग्राहकों को उसका ध्येय (हाउसिंग लोन आदि) प्राप्त करने के तरीके बताता है।

फाइनेंशियल एनालिस्ट एवं सिंडीकेट बैंक के पूर्व मैनेजर डी. श्रीधर कहते हैं, ‘लोगों के पास आज समय का अभाव है। वह अपनी पूंजी को उचित व फलदायक क्षेत्र में निवेश करना चाहते हैं। फाइनेंशियल एनालिस्ट अपनी आर्थिक रिसर्च में विभिन्न क्षेत्रों व कंपनियों के तुलनात्मक अध्ययन से बताता है कि उनका निवेश किस क्षेत्र में होना चाहिए। वह यह भी बताता है कि किस कंपनी में निवेश सुरक्षित रहेगा व अच्छा रिटर्न भी देगा।’

इसमें अच्छी सैलरी की संभावना होती है

इस क्षेत्र में सैलरी संस्था-दर-संस्था अलग-अलग तय होती है। एक नये क्वालिफाइड फाइनेंशियल एनालिस्ट को वर्ष में 4 से 4.50 लाख रुपए का वेतनमान मिल सकता है। अनुभव के साथ सैलरी बढ़ती जाती है। एमएनसी का ‘टॉप फाइनेंशियल एनालिस्ट’ एक करोड़ से सवा करोड़ रुपए प्रति वर्ष का स्केल भी पा सकता है।

फाइनेंशियल एनालिस्ट बनने के लिए क्या हों गुण

उनमें अकाउंटेंसी की महारत होनी चाहिए, यानी कॉमर्स बैकग्राउंड जरूरी है।
गणित का ज्ञान आवश्यक है, तभी विभिन्न क्षेत्रों के आंकड़ों का अध्ययन कर सकेगा।
उनमें आर्थिक विश्लेषण करने की क्षमता होनी चाहिए।
उनमें फाइनेंशियल निवेश करने की समझ व दिलचस्पी होनी चाहिए।

कैसे बनें फाइनेंशियल एनालिस्ट

परिपक्व फाइनेंशियल एनालिस्ट बनने के लिए कॉमर्स विषय का बैकग्राउंड आवश्यक है। 12वीं कक्षा में गणित विषय इसमें सहायक हो सकता है। क्वालिफाइड फाइनेंशियल एनालिस्ट के लिए अमेरिका में मूल कोर्स दो वर्ष का होता है व बैचलर डिग्री मिलती है। भारत में आईसीएफएआई से संबद्ध कई यूनिवर्सिटीज दो साल का ‘अंडर ग्रेजुएट’ कोर्स प्रदान कर रही हैं। इसके लिए कॉमर्स की बैचलर डिग्री आवश्यक है। सीए, कॉस्ट एंड वर्क अकाउंटेंट्स, कंपनी सेक्रेटरी या एमबीए (फाइनेंस) वालों को यह डिग्री एक वर्ष में भी मिल सकती है। चार साल का ‘वर्क एक्सपीरिएंस’ होना चाहिए। इसमें पार्ट टाइम या इंटर्नशिप का अनुभव नहीं जोड़ा जाता।

कहां करें पढ़ाई

सीएफए इंस्टीटय़ूट, यूएसए
आईसीएफएआई, बंजारा/नागार्जुन हिल्स, हैदराबाद
बिड़ला इंस्टीटय़ूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज, पिलानी
जेवियर इंस्टीटय़ूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च, भुवनेश्वर
आईसीएफएआई यूनीवर्सिटी, त्रिपुरा
नरसी मोन्जी इंस्टीटय़ूट ऑफ मैनेजमेंट, मुम्बई
एसपी जैन इंस्टीटय़ूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च, मुम्बई

फाइनेंशियल एनालिस्ट बनने के फायदे व नुकसान

बढ़िया सैलरी मिलती है।
बौद्धिक व दिलचस्प विषय है।
हार्ड प्रेशर जॉब व देर तक लगातार कार्य करना पड़ सकता है।
चुनौतीपूर्ण व कंपिटीटिव कार्य क्षेत्र है।

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