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भाजपा दया की पात्र नहीं, बराबर की भागीदार: तिवारी

जनता दल (युनाइटेड) के सांसद एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता शिवानंद तिवारी का कहना है कि बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दया की पात्र नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार है, न कि किसी खास पार्टी की।

तिवारी ने कहा, ''राज्य में प्रजातंत्र की आदर्श स्थिति बन गई है। मैं यह दावा नहीं कर रहा हूं कि सरकार ने राज्य में सब कुछ सुधार लिया गया है, लेकिन स्थिति बेहतर अवश्य हुई है। मतदाताओं ने पिछले विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से राजग को सत्ता में पहुंचाया, जिससे साफ हो गया है कि लोग इस सरकार का समर्थन कर रहे हैं।''

यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा बिहार में दया की पात्र बन कर रह गई है, उन्होंने कहा, ''जद (यू) और भाजपा में कोई विवाद नहीं है। सरकार अच्छी चल रही है। भाजपा को बराबर की इज्जत और पूरी भागीदारी मिल रही है। दोनों दलों का गठबंधन काफी पुराना है और मजबूती से चल रहा है। इसमें किसी के बड़े-छोटे या दया का पात्र होने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता।''

भाजपा का एजेंडा लागू करने में सरकार की दिलचस्पी नहीं होने के सवाल पर उन्होंने कहा, ''राज्य में राजग की सरकार है। सरकार अल्पसंख्यकों की बेहतरी के लिए कई कार्यक्रम चला रही है। सरकार भ्रष्टाचार और विधि व्यवस्था में सुधार के लिए भी दृढ़संकल्प है। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए ही विधायक फंड समाप्त किए गए। अब सांसद फंड भी समाप्त करने की मांग उठाई जा रही है।''

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार नौकरशाह चला रहे हैं, उन्होंने कहा, ''कोई नेता सरकार चला सकता है क्या? सरकार चलाने में अधिकारियों की मदद ली ही जाएगी। सरकार अपने दायित्व का निर्वहन कर रही है और नौकरशाह अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह कर रहे हैं। कार्यों का संपादन तथा बनाए गए नियमों का पालन तो अधिकारी और कर्मचारी ही लागू करवाते हैं।''

बिजली की समस्या के बारे में सवाल किए जाने पर उन्होंने इसका दोष केंद्र पर डाल दिया और कहा, ''वह (केंद्र सरकार) राज्य के लिए अड़ंगा लगा रही है। राज्य सरकार बिजली परियोजनाओं के लिए कोल लिंकेज की मांग कर रही थी। लेकिन जो कोल ब्लॉक मिला था उसे भी रद्द कर दिया गया। राज्य सरकार द्वारा कोल ब्लॉक को विकसित करने के लिए दो बार निविदाएं निकाली गईं, लेकिन तकनीकी कारणों से यह निष्पादित नहीं हो सकी। कोल लिंकेज की मांग को केंद्र सरकार को तुरंत पूरा करना चाहिए।''

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार, लालू प्रसाद तथा हम सभी समाजवादी आंदोलन की उपज हैं। लालू प्रसाद वादे पूरे नहीं करते और उनमें नाटकीयता भी है, जबकि नीतीश के साथ ऐसा नहीं है। जनता ने उन पर इतना बड़ा भरोसा जताया, फिर भी उनमें अहम नहीं है।

वह कहते हैं कि बिहार में शुरू से ही ऐसे नेतृत्व का अभाव रहा है जो विकास की राजनीति करे। केंद्र पर दबाव बनाने के लिए कभी प्रयास नहीं किए गए। आज भी बिजली की समस्या को लेकर भाजपा-जद (यू) के अलावा कोई अन्य दल खड़ा नहीं हो रहा। केंद्र सरकार कहती है कि बिहार को पैसा दिया जा रहा है। लेकिन केंद्र से बिहार को खरात नहीं मिल रही, बल्कि वही पैसा मिल रहा है, जो नियम के तहत अन्य राज्यों को मिलता है।

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