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आर्कटिक परिषद का पर्यवेक्षक बन सकता है भारत

आर्कटिक परिषद का पर्यवेक्षक बन सकता है भारत

भारत आर्कटिक परिषद का पर्यवेक्षक बन सकता है। हालांकि कोई भी देश इसका सदस्य तब तक नहीं बन सकता जब तक कि उसकी सीमा आर्कटिक परिक्षेत्र से ऊपर न हो।

अमेरिका के महासागर एवं मत्स्य विभाग के उप सहायक मंत्री डेविड बाल्टन ने कहा कि कोई भी देश आर्कटिक परिषद की सदस्यता तब तक ग्रहण नहीं कर सकता जब तक उसका भूखंड आर्कटिक क्षेत्र से ऊपर न हो।

भारत का ऐसा कोई भूखंड आर्कटिक क्षेत्र से नहीं लगता। भारत इस परिषद का पर्यवेक्षक बन सकता है और वह इस तरह से आर्कटिक परिषद की ओर से विभिन्न विषयों पर गठित कार्यकारी समूहों में काम भी कर सकेगा।

उन्होंने आर्कटिक परिषद मंत्रियों की बैठक से पहले संवाददाताओं से कहा कि भारत और अन्य गैर आर्कटिक देश आर्कटिक मुद्दों पर विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाली बैठकों में हिस्सा ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि नौ परिवहन मुद्दे आर्कटिक परिषद में शामिल नहीं है। वे वास्तव में आर्कटिक परिषद की जिम्मेदारी नहीं हैं। इस मुद्दे को अन्य मंच अंतरराष्ट्रीय समुद्रीय संगठन द्वारा देखते हैं। भारत इस संगठन का पूर्ण सदस्य है, विश्व के अधिकतर देश इसके सदस्य हैं।

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