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...तो पाक फौज से भिड़ जाते 'सील्स'

...तो पाक फौज से भिड़ जाते 'सील्स'

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को पकड़ने या मारने के मिशन पर भेजे गए नौसेना के सील्स कमांडरों को, अभियान के दौरान पाकिस्तानी पुलिस या बलों से संघर्ष होने की स्थिति में उनसे मुकाबला करने के लिए अधिकृत किया था।

न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक खबर में कहा गया है कि अपने कुछ सलाहकारों की इच्छा के प्रतिकूल राष्ट्रपति ओबामा ने अपने लड़ाकू दल का आकार बड़ा करने पर जोर दिया, ताकि अभियान के दौरान संघर्ष होने पर वे पाकिस्तानी बलों का सफलतापूर्वक मुकाबला कर सकें।

पाकिस्तान पहले ही यह कह चुका है कि उसने ऐबटाबाद में अपने जेट विमानों और बलों को विदेशी बलों से निपटने के लिए फौरन बुला लिया था, लेकिन अमेरिकी विशेष बलों ने करीब 40 मिनट में अभियान को अंजाम दे दिया और परिसर से सफलतापूर्वक चले गए थे।

संसद में सोमवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने कहा कि ऐबटाबाद की घटना अमेरिकी बलों के गुप्त आकस्मिक हमले पर हमारी सेना की प्रतिक्रिया बताती है। वायु सेना को फौरन बुला लिया गया था। जमीनी यूनिटें तत्काल पहुंच गईं थी। हमारी प्रतिक्रिया हमारे सशस्त्र बलों की तत्परता बताती है जिसकी उनसे अपेक्षा रहती है।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा है कि पाकिस्तान भेजे गए दल का आकार बढ़ाने का ओबामा का फैसला बताता है कि ओबामा को अलकायदा प्रमुख को पकड़ने या मारने के लिए अपने एक करीबी सहयोगी के साथ सैन्य टकराव का खतरा मोल लेने में भी कोई परहेज नहीं था।

न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर में कहा गया है अगर ऐसा टकराव होता तो यह अभियान की तुलना में पाकिस्तानियों के साथ कहीं अधिक बड़ा उल्लंघन होता क्योंकि इस्लामाबाद में अधिकारियों को पता चल गया था कि नौसेना के सील दल के सदस्यों को लेकर हेलीकॉप्टर उनके किसी शहर की ओर गए हैं, इन हेलीकॉप्टरों का पता नहीं चल पाया था और फिर उस परिसर पर हमला हुआ जहां लादेन छिपा था।

ओबामा प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी को यह कहते हुए उद्धत किया गया है उन्हें आदेश दिया गया था कि जहां तक संभव हो, वह कोई भी टकराव टालें। लेकिन यदि स्थिति प्रतिकूल होती तो उन्हें इसका मुकाबला करने के लिए अधिकृत किया गया था।

अखबार की खबर में कहा गया है पूरी योजना से यह भी पता चलता है कि प्रशासन ने अभियान  तैयारी में पाकिस्तानियों पर कितना कम भरोसा किया। उन्होंने पाकिस्तानियों को अभियान से जोड़ने का प्रस्ताव भी खारिज कर दिया था।

मूल योजना के अनुसार, दो हेलीकॉप्टर ऐबटाबाद भेजे गए और दो हेलीकॉप्टर सीमा पर अफगानिस्तान के हिस्से में रूक कर यह इंतजार करने को भेजे गए कि यदि उनकी जरूरत पड़ती है तो वह जाएं। बहरहाल, इनकी लादेन के परिसर से दूरी 90 मिनट रही होगी।

एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को यह कहते हुए उद्धत किया गया है कि पाकिस्तान के साथ फिलहाल कठिन संबंधों को देखते हुए राष्ट्रपति कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते थे। अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रपति अतिरिक्त बल चाहते थे ताकि जरूरत पड़ने पर समस्या न हो।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है दल नौसेना के एक पोत में मिलने वाला था। ज्यादातर संभावना थी कि यह पोत उत्तरी अरब सागर में विमान वाहक कार्ल विन्सन होगा।

दो मई को ऐबटाबाद स्थित परिसर पर हमले के बाद से अमेरिका और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है ऐसे में स्थिति को शांत करने के लिए सोमवार को अमेरिकी अधिकारियों ने कुछ उत्साहजनक घटनाक्रम के बारे में बताया।

अखबार में एक अमेरिकी अधिकारी को यह कहते हुए उद्धत किया गया है कि अमेरिकी जांचकर्ताओं को जल्द ही लादेन की तीन विधवाओं से पूछताछ करने की अनुमति मिलेगी। लादेन की ये तीनों विधवा फिलहाल पाकिस्तान प्रशासन के कब्जे में हैं और पिछले सप्ताह टीवी पर ओबामा के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थॉमस डोनिलॅन ने यह मांग की थी।

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