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‘सत्याग्रह’ का आचरण हो

भाजपा की विकास यात्रा व अंत्योदय योजना के जवाब में प्रदेश के कांग्रेसियों की सत्याग्रह यात्रा न सिर्फ हास्यास्पद है बल्कि भारत की स्वतंत्रता से जुड़े सत्याग्रह जैसे चिरस्मरणीय आन्दोलन का अपमान भी है। क्या प्रदेश के कांग्रेसजन वास्तव में सत्याग्रह शब्द के अनुरूप आचरण कर रहे है? विधानसभा चुनाव पास देखते हुए मतदाताओं के बीच जाकर सरकार की नाकामी उजागर करना विपक्ष का जन्मसिद्ध अधिकार तो है किन्तु उसके लिए सत्याग्रह जैसे पवित्र शब्द का प्रयोग सर्वथा अनुचित है। भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रदेश के कांग्रेसजन यदि इतने गंभीर है तो उन्हें सर्वप्रथम हाल ही में केन्द्र सरकार की नाक के नीचे हुए महाघोटालों की प्रखर ढंग से आलोचना करनी चाहिए। साथ ही विदेशों में जमा काले धन को वापस लाने के लिए व्यापक आंदोलन छेड़ना चाहिए।
संजीव विनोदिया, गढ़ी कैंट, देहरादून

भर्ती में हो पारदर्शिता
उत्तराखण्ड शासन ने समूह ‘ग’ की भर्ती की विज्ञप्ति जारी की है किन्तु पाठ्यक्रम प्रकाशित नहीं किया है। शैक्षिक योग्यता के आधार पर 50 प्रश्नों का उल्लेख है, किन्तु पाठ्यक्रम का उल्लेख नहीं है। सांख्यिकी, गणित, अर्थशास्त्र एवं वाणिज्य की शैक्षिक योग्यता वाले समान पद के प्रश्नों का स्वरूप क्या होगा? मुख्य सेविका पद के लिए शैक्षिक योग्यता स्नातक समाजशास्त्र या गृह विज्ञान रखी है किन्तु यह स्पष्ट नहीं है कि 50 प्रश्न समाजशास्त्र के होंगे या गृहविज्ञान के। शिक्षा विभाग में भी टीईटी परीक्षा होगी, किंतु पाठ्यक्रम प्रकाशित नहीं किया गया है और उत्तीर्ण होने के लिए 60 प्रतिशत अंक चाहिए। शासन से अनुरोध है कि पीसीएस, यूजीसी की तरह पाठ्यक्रम बेवसाइट पर प्रचारित कर परीक्षा में पारदर्शिता लाने का कष्ट करें। वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की संख्या कम से कम 150 की जाए जिसमें 50 सामान्य ज्ञान, 50 सामान्य हिन्दी, एवं 50 सम्बन्धित योग्यता के हो।
डॉ. अमित अग्रवाल, चम्पावत

गुमराह क्यों कर रही सरकार?
एक तरफ तो हमारी प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार दिलाने के दावे कर रही है, दूसरी तरफ पिछली भर्तियों के लिए हुई परीक्षा के परिणाम दो से तीन साल में आ रहे हैं। देहरादून जिले में दो साल बाद भी स्वास्थ्य विभाग में चतुर्थ श्रेणी पदों के लिए हुई परीक्षा परिणाम घोषित नहीं किया गया। सूचना के अधिकार से पता चला कि छठे वेतन के सम्बन्ध में कुछ बिंदुओं पर सूचना मांगी गई है। जैसे ही सूचना प्राप्त होगी वैसे ही परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। लेकिन सुनने में आ रहा है कि चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भविष्य में कोई भर्ती नहीं होगी। यदि भविष्य में कोई भर्ती नहीं होगी तो उन युवाओं का क्या होगा जो परिणाम की आस लगाए बैठे हैं? आखिर क्यों यह परिणाम घोषित नहीं किए जा रहे है? राज्य सरकार को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है।
यतेन्द्र चन्द्र, कोटद्वार पौड़ी गढ़वाल

ई.पी.एफ. विभाग की सच्चाई
कहने को तो पी.एफ. का स्थानान्तरण इलेक्ट्रॉनिक विधि द्वारा शीघ्र ही हो जाता है (नेफ्ट प्रोग्राम द्वारा) और विभाग ने इसका प्रचार टीवी एवं अखबारों में जोर-शोर से किया। पर हकीकत यह है कि सरकार द्वारा कंप्यूटरीकृत करने के बाद भी पी.एफ. के कर्मचारी अपने पुराने ढर्रे पर कार्य कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक विधि द्वारा की गई शिकायत पर कोई कार्रवाई ही नहीं होती। और तो और क्षेत्रीय आयुक्त महोदय को मेल करने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती है। अगर आप कार्यालय जाओ तो बाबू लोग आपको आयुक्त साहब से मिलने नहीं देंगे। सरकार द्वारा पी.एफ. कार्यालयों के नवीनीकरण के लिए खर्च किए गए करोड़ों रुपये भी बेमानी सिद्ध हो रहे है और पी.एफ. सदस्यों के भविष्य निधि पर पी.एफ. कर्मचारियों का खिलवाड़ लगातार जारी है जबकि कम आय वर्ग के लिए ई.पी.एफ ही बचत का मुख्य जरिया है।
गिरजाशंकर, ऊधमसिंह नगर

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