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सभी पक्षों ने उच्चतम न्यायालय के आदेश पर संतुष्टि जताई

अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवादित स्थल से जुड़े विभिन्न पक्षों ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय के आदेश पर संतुष्टि जताई। उच्चतम न्यायालय ने विवादित स्थल को तीन भागों में बांटने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले पर आज रोक लगा दी।

विवादित स्थल के विभिन्न पक्षों भगवान रामलला विराजमान, हिंदू महासभा और सुन्नी वक्फ बोर्ड की पैरवी कर रहे उनके अधिवक्ताओं ने उच्चतम न्यायालय के अंतरिम आदेश पर संतुष्टि जताई। न्यायालय ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि किसी भी पक्ष ने 2.77 एकड़ भूमि को विभाजित करने की मांग नहीं की थी।

रामलला विराजमान की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने अयोध्या विवाद पर सुनवाई के बाद न्यायालय परिसर में कहा कि विवादित स्थल यानी रामलला के अस्थायी मंदिर की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होगा। सात जनवरी 1993 के आदेश के अनुसार पूजा जारी रहेगी।

छह दिसंबर 1992 को मस्जिद ढहाने के बाद आंदोलनकारियों ने अस्थाई मंदिर बनाया था। सात जनवरी 1993 को कांग्रेस सरकार अयोध्या अधिनियम 1993 लेकर आई।

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