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मैच जीतना है तो रैना है ना!

मैच जीतना है तो रैना है ना!

सुरेश रैना भारत के टेलेंटेड युवा क्रिकेटरों में से एक हैं। रैना ने कम उम्र में ही भारतीय टीम में जगह बना ली थी। वह भारत के इकलौते क्रिकेटर हैं, जिन्होंने टेस्ट मैच, वनडे और ट्वेंटी-20, तीनों तरह के क्रिकेट में सेंचुरी बनाई है। यह कारनामा अभी तक भारत का कोई और क्रिकेटर नहीं कर पाया है। रैना का जन्म उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मुरादनगर में 27 नवंबर 1986 को हुआ था। कश्मीरी पंडितों के परिवार में जन्मे रैना पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं।

रैना बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और मिडल ऑर्डर में खेलते हैं। इसके अलावा वे दाहिने हाथ के ऑफ ब्रेक गेंदबाज भी हैं। उनकी फील्डिंग के तो क्या कहने! वे भारत के बेस्ट फील्डरों में से एक हैं। बॉल की क्या मजाल, जो उनके आसपास से निकल जाए! उन्होंने 8 टेस्ट मैचों में 33.90 की औसत से 373 रन बनाए हैं, जिसमें एक शतक शामिल है। वहीं 115 वनडे मैचों में तीन शतकों के साथ 35.69 की औसत से 2713 रन और 19  टी-20 इंटरनेशनल मैचों में 33.93 की औसत से 509 रन बनाए हैं, जिसमें एक शतक शामिल है।

रैना ने 1999 में क्रिकेट को सीरियसली लेना शुरू किया और पांच साल में ही भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाने में सफल हो गए। उन्होंने पहला इंटरनेशनल मैच 30 जुलाई 2005 को श्रीलंका के खिलाफ खेला था, जो वनडे था। डेढ़ साल बाद 1 दिसंबर 2006 को उन्होंने पहला टी-20 इंटरनेशनल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला। हालांकि टेस्ट मैच खेलने के लिए उन्हें काफी लंबा इंतजार करना पड़ा। उन्होंने पहला टेस्ट (26-30 जुलाई 2010) श्रीलंका के खिलाफ खेला और अपने पहले ही टेस्ट में सेंचुरी ठोक डाली।

रैना को लोग प्यार से सानू कहकर भी बुलाते हैं। सबसे छोटे होने के कारण घर में वे सबसे दुलारे बच्चों थे और इसी लाड़-प्यार की वजह से वे घर छोड़कर कहीं जाना नहीं चाहते थे। लखनऊ के स्पोर्ट्स कॉलेज में जब उनको एडमिशन मिला तो वहां जाने का उनका मन नहीं था, लेकिन बाद में काफी समझाने पर चले गए। रैना आज भारत के सबसे आक्रामक और भरोसेमंद बल्लेबाजों में से एक माने जाते हैं।   

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