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अयोध्या मामले में हाईकोर्ट के फैसले पर रोक

अयोध्या मामले में हाईकोर्ट के फैसले पर रोक

उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या में विवादास्पद राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल को तीन भाग में विभाजित करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले पर सोमवार को रोक लगाते हुए कहा कि यह कुछ अजीब फैसला है, क्योंकि किसी पक्ष ने भूमि को तीन भाग में बांटने की मांग नहीं की थी।

न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के 13 सितंबर 2010 को दिए गए फैसले पर रोक लगाते हुए विवादास्पद स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।

न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायमूर्ति आर एम लोढ़ा की पीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले को कुछ अजीब बताते हुए कहा कि विवादास्पद भूमि के विभाजन का आदेश दिया गया, जबकि किसी भी पक्ष ने उसे बांटने की बात नहीं की थी।

पीठ ने व्यवस्था दी कि विवादास्पद ढांचे से लगी जिस 67 एकड़ भूमि को केंद्र सरकार ने अधिग्रहीत किया है, उस पर कोई धार्मिक गतिविधि नहीं होनी चाहिए। पीठ ने कहा कि शेष भूमि के संदर्भ में यथास्थिति बनाए रखना चाहिए। अदालत के आदेश के मद्देनजर विवादास्पद स्थल में रामलला के अस्थायी मंदिर में पूजा सामान्य तरीके से जारी रहेगी।

गत सितंबर में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उस 2.77 एकड़ भूमि को तीन भागों में बांट कर मुसलमानों, हिन्दुओं और निर्मोही अखाड़ा को देने का आदेश दिया था, जिस पर कभी विवादास्पद ढांचा खड़ा था।

पीठ ने कहा उच्च न्यायालय ने एक नया आयाम दे दिया, क्योंकि पक्षों ने भूमि के विभाजन पर आदेश नहीं मांगा था। इसके लिए किसी ने भी आग्रह नहीं किया था। इस पर रोक लगाई जाती है। यह एक अजीब आदेश है।

उच्च न्यायालय के फैसले पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए पीठ ने कहा कि जब किसी भी पक्ष ने भूमि के विभाजन का अनुरोध नहीं किया तो ऐसी व्यवस्था कैसे दी जा सकती है। पीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाते हुए कहा अदालत ने जो किया वह अपनी ओर से किया। यह अजीब है। इस तरह के आदेश पर अमल की अनुमति नहीं दी जा सकती।

पीठ ने कहा कि अब यह एक कठिन स्थिति है, हालत यह है कि हाईकोर्ट के फैसले ने याचिकाओं का अंबार लगा दिया है। विभिन्न हिन्दू और मुस्लिम धार्मिक संगठनों द्वारा दाखिल की गई अपीलें हालांकि केवल 2.77 एकड़ विवादास्पद भूमि से संबंधित हैं, लेकिन पीठ ने विवादास्पद भूमि से लगी 67 एकड़ जमीन पर भी यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।

पीठ निर्मोही अखाड़ा, अखिल भारत हिन्दू महासभा, जमायत उलेमा ए हिन्द और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की अपीलों की सुनवाई कर रही थी। एक अपील रामलला विराजमान की ओर से भी की गई है।

वक्फ बोर्ड और जमायत उलेमा ए हिन्द ने कहा है कि हाईकोर्ट का फैसला खारिज कर दिया जाना चाहिए क्योंकि यह साक्ष्यों पर नहीं बल्कि आस्था पर आधारित है। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह कह कर गलती की है कि ढहाई गई बाबरी मस्जिद भगवान राम के जन्मस्थान पर बनी थी।

उन्होंने यह भी कहा कि विवादास्पद जमीन पर मुसलमानों, हिन्दुओं और निर्मोही अखाड़े के दावे अलग अलग हैं और उन्हें साझा नहीं किया जा सकता। अपीलों में कहा गया है कि हाईकोर्ट में किसी का ऐसा मामला नहीं था कि मुसलमानों, हिन्दुओं और निर्मोही अखाड़े का विवादास्पद परिसर पर संयुक्त अधिकार हो।

तीनों वादियों के दावे इस प्रकार से विशिष्ट हैं क्योंकि तीनों में से प्रत्येक ने पूरी संपत्ति पर ऐसे दावा किया है जैसे वह उसकी अपनी हो। किसी ने भी संपत्ति के विभाजन का आदेश नहीं मांगा। दूसरी ओर हिन्दू महासभा ने हाईकोर्ट के फैसले के उस भाग को रद्द करने की मांग की है जिसमें विवादास्पद स्थल का एक तिहाई भाग मुसलमानों को देने का आदेश है।

हिन्दू महासभा ने 30 सितंबर को न्यायमूर्ति धरमवीर शर्मा द्वारा दिए गए फैसले की सुप्रीम कोर्ट से पुष्टि चाही है, जिसमें पूरी भूमि हिन्दुओं को देने की बात कही गई थी। याचिका में हिन्दू महासभा ने कहा है कि हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एसयू खान और न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल द्वारा दिए गए बहुमत के फैसले के उस भाग को निरस्त कर देना चाहिए, जिसमें विवादास्पद स्थल की एक तिहाई संपत्ति मुसलमानों के पक्ष में घोषित की गई है।

हिन्दू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति धरमवीर शर्मा द्वारा दिए गए फैसले को एक प्रभावी फैसला बनाए रखने की अपील की है। गत 30 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने तीन अलग-अलग फैसले दिए थे, जिनमें बहुमत वाला फैसला था कि तीन गुंबदों वाले ढांचे का केंद्रीय गुंबद जितनी भूमि में है, जहां भगवान राम की प्रतिमा स्थापित है, वह स्थान हिन्दुओं का है।

न्यायमूर्ति खान और न्यायमूर्ति अग्रवाल का कहना था कि पूरी विवादास्पद भूमि को तीन भागों में बांट देना चाहिए और एक एक भाग क्रमश: सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान का प्रतिनिधित्व करने वाले पक्ष को दे देना चाहिए। न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा था कि पूरी विवादास्पद भूमि हिन्दुओं की है।

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