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मोहब्बत की जंग इंसाफ की दहलीज पर हारे

एक प्रेमी जोड़े ने प्यार कर सबसे बड़ा गुनाह कर लिया। एक ही बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले इस जोड़े ने घरवालों से बगावत कर शादी कर ली। लेकिन इनकी शादी को सामाजिक समर्थन नहीं मिला। घर से भागने पर परिवार के लोगों ने एफआईआर दर्ज करा दी।

अदालत से प्रेमी जोड़े को इंसाफ मिलने की उम्मीद थी लेकिन इंसाफ की दहलीज पर ही मोहब्बत रुसवा हो गई। बालिग होने के तमाम सुबूत दिए गए लेकिन अदालत ने गंभीर प्रकृति के अपराध में मामला दर्ज होने के कारण उन्हें नहीं माना। साथ ही प्रेमी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। प्रेमिका को कहां भेजना है ? इस पर अभी न्यायालय ने कोई फैसला नहीं लिया। परिवारीजनों ने सुपुर्दगी मांगी तो उसे भी न्यायालय ने खारिज कर दिया।

सैनी कोतवाली के गोविंदपुर गोरियो गांव की रहने वाली सोनी फतेहपुर के हथगांव निवासी मोनूलाल से प्यार करती थी। दोनों का प्यार परवान चढ़ा तो एक दूसरे के बगैर बेकरार रहने लगे। परिवार के लोगों को जानकारी हुई तो उन्होंने पहरा लगा दिया। एक-दूसरे की जुदाई प्रेमी युगल बर्दाश्त न कर सका और घर से भागकर शादी कर ली। परिवारीजनों ने मामले में मोनूलाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया।

न्यायालय में सोनी ने अपने बालिग होने के तमाम प्रमाण दिए। युवक को अदालत ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। सोनी को युवक के पिता ने बहू मानते हुए अदालत से सुपुर्दगी में लेने की गुहार लगाई लेकिन अदालत ने अर्जी खारिज कर दी। सोनी ने घर जाने की अर्जी दी तो उसकी भी कोई सुनवाई नहीं हुई। विवेचक ने अदालत में प्रेमिका को कहां ले जाना है और कहां भेजना है इस पर निर्णय मांगा, लेकिन अदालत ने अब तक कोई फैसला नहीं किया है। इससे प्रेमिका पुलिस हिरासत में है। अदालत के निर्णय न सुनाने से पुलिस भी परेशान है।

सीआरपीसी की धारा 98 में अपह्रत की गई किशोरियों व महिलाओं के संबंध में स्पष्ट प्रावधान हैं। इसके अधीन सक्षम अधिकारिता युक्त मजिस्ट्रेट अपह्रता की सुपुर्दगी की बाबत आदेश पारित कर सकते हैं। यदि ऐसा प्रार्थना पत्र खारिज किया जाता है। तो धारा 397 सीआरपीसी के तहत सेशन कोर्ट में रिवीजन दाखिल किया जा सकता है।

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