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बैंकों में बचत खाता रखना पड़ सकता है महंगा

बैंकों में बचत खाता रखना पड़ सकता है महंगा

बचत खातों पर ब्याज दरें बढ़ने से भले ही लोगों के चेहरे खिल उठे, लेकिन यह मुस्कान अधिक समय तक कायम नहीं रह सकेगी क्योंकि बैंक लागत की भरपाई के लिए ग्राहकों से कुछ सेवाओं पर शुल्क वसूल सकते हैं।
   
वर्ष 1993 से बचत खाते पर लोगों को 3.5 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता रहा है जिससे बैंकों को कम लागत में जमा रखने और अच्छा मार्जिन हासिल करने में मदद मिली। यही वजह है कि बैंकों द्वारा ग्राहकों को कई सेवाएं मुफ्त में दी जा रही थीं।
   
लेकिन पिछले सप्ताह रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दर बढ़ाकर 4 प्रतिशत किए जाने और बचत खाते पर ब्याज दर नियंत्रणमुक्त किए जाने का संकेत देने से ग्राहकों से लेनदेन शुल्क वसूले जाने की संभावना है।
   
एचडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक आदित्य पुरी ने कहा कि अगर बचत खातों पर ब्याज दरें बढ़ती रहती हैं तो ग्राहकों के लिए लेनदेन शुल्क बढ़ जाएगा, आखिर बैंकों को भी जीवित रहना है।

इसके अलावा, बैंकों द्वारा न्यूनतम बैलेंस रहीं रखने वाले ग्राहकों से शुल्क वसूला जा सकता है और साथ ही न्यूनतम बैलेंस की राशि भी बढ़ाई जा सकती है। बैंक चेक जारी करने के शुल्क भी बढ़ा सकते हैं।

कम लागत की बचत जमाओं के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ने से दरें बढ़ने और मार्जिन प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए ज्यादातर बैंकरों ने बचत खातों की ब्याज दरों को नियंत्रण मुक्त करने पर फिलहाल आपत्ति जताई है।

रेटिंग एजेन्सी क्रिसिल ने कहा कि अगर रिजर्व बैंक बचत खातों की जमाओं पर ब्याज दरें नियंत्रण मुक्त करता है तो इससे शुद्ध ब्याज मार्जिन पर दबाव बढ़ने की संभावना है।

सेंट्रल बैंक आफ इंडिया के सीएमडी एस़ श्रीधर ने बताया कि बचत खातों पर ब्याज दरों को नियंत्रण मुक्त करना समय से पहले का कदम होगा क्योंकि बैंकों को तंत्र में अदक्षता से निपटने के लिए अधिक मार्जिन की जरूरत है। श्रीधर ने कहा कि बैंकों ने हाल के वर्षों में प्रौद्योगिकी पर भारी धन खर्च किया है और उन्हें लागत निकालने की जरूरत है।

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