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लोकप्रिय ब्रांड के दबाव से मजबूरी में बिकतीं छोटी कंपनियां

रोजमर्रा इस्तेमाल की चीजों के बाजार में हिंदुस्तान युनिलीवर और प्राक्टर एंड गैंबल जैसी दिग्गज कंपनियों से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा को देखते हुए छोटी कंपनियां अपने लोकप्रिय ब्रांडों को इन बड़ी कंपनियों को बेच रही हैं।
   
छोटी कंपनियों में जहां ओजोन आयुर्वेदिक्स अपने लोकप्रिय बांड नोमार्क्‍स को बेचने की संभावना तलाश रही है, वहीं मुंबई स्थित अजंता फार्मा ने हाल ही में ऊर्जा प्रदान करने वाले कैप्सूल 30-प्लस को बेच दिया।

आनंद राठी फाइनेंशियल सर्विसेज के विश्लेषक शिरीश परदेसी ने बताया कि मुद्दा यह है कि अगर प्रबंधन ब्रांड को संभालने में असमर्थ है या उसे अमुक ब्रांड लाभप्रद नजर नहीं आता तो बेहतर यही है कि वह उसे बेच दे।

उन्होंने कहा कि ब्रांड के लोकप्रिय होने पर यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि उस ब्रांड के वितरण के लिए नेटवर्क मजबूत किया जाए तभी वह अपने से मजबूत ब्रांडों को टक्कर दे सकता है।
   
ओजोन आयुर्वेदिक्स ने कहा कि वह अपने नोमार्क्‍स ब्रांड को बेचने की इच्छुक है। नोमार्क्‍स हिंदुस्तान युनिलीवर की फेयर एंड लवली और रेकिट बेंकाइजर के क्लियरसिल से मुकाबला करता है।
   
इसी तरह, अजंता फार्मा ने डाबर को अपना 30-प्लस ब्रांड बेच दिया। पिछले साल मूव, क्रैक और सेट वेट जैसे मजबूत ब्रांड रखने वाली पारस फार्मा 3,260 करोड़ रुपये में ब्रिटेन की रेकिट बेंकाइजर के हाथ बिक गई।

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  • Web Title:लोकप्रिय ब्रांड के दबाव से मजबूरी में बिकतीं छोटी कंपनियां