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तो क्या यह हो सकता है भविष्य?

एंड्रॉयड का ‘मेड फॉर टेबलेट’ 3.0 वजर्न टेबलेट्स को एक अलग ही श्रेणी में ले जाएगा। इसके इंटरफेस ट्वीक्स, मीडिया प्लेबैक क्षमताएं, तेज हार्डवेयर को सपोर्ट और हार्डवेयर निर्माताओं की ‘एकीकरण’ की क्षमता को रोकने से गूगल का ऑपरेटिंग सिस्टम अधिक मुख्यधारा में आ पहुंचेगा। लेकिन इस्तेमालकर्ताओं के लिए यह बेहतर होगा या नहीं, यह समय ही बताएगा?

आरआईएम की प्लेबुक टेबलेट जितना व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए बनाया गया है, उतना ही व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए भी। इसका प्रयास दफ्तर में सबके लिए एक बड़ी स्क्रीन पर कार्य कराना भी है, जिसमें कई अनोखी सुविधाएं होंगी। प्रश्न है कि क्या यह फिर भी एक संपूर्ण टेबलेट है? नहीं, लेकिन यह ब्लैकबेरी स्मार्टफोन से व्यावसायिक इस्तेमालकर्ता के लिए बेहतर होगा। इसमें क्यूएनएक्स ऑपरेटिंग सिस्टम इंस्टॉल है। आरआईएम इसके तार एंड्रॉयड एप्लीकेशन से जोड़ने का प्रयास कर रहा है और यदि यह प्रयास सफल न रहा तो क्यूएनएक्स को कोई अन्य योजना बनानी होगी।

एचपी एंड्रॉयड को चुनौती देने के लिए वेबओएस का इस्तेमाल कर रहा है। यह वही ओएस था, जो पाम्स के स्मार्टफोन बिजनेस को नहीं संभाल पाया था, लेकिन अब वह एंड्रॉयड और आईओएस को सफलतापूर्वक चुनौती दे रहा है। एचपी ने वेबओएस की अनेक अपडेट्स को नकारा भी है। तो उम्मीद है कि वेबओएस में सुधार कार्य रुकेगा नहीं और यह सफल रहेगा।

माइक्रोसॉफ्ट का टेबलेट प्लान एक ऐसी पहेली है, जिसे कोई अभी तक सुलझा नहीं पाया। हालांकि विंडोज 7 आधारित टेबलेट आए हैं, लेकिन उनकी प्रकृति किसी डेस्कटॉप ऑपरेटिंग सिस्टम जैसी ही रही है। प्रतिद्वंद्वियों के समक्ष यह एक आदिम पुरुष सरीखा ही लगता है। 

इस वर्ष माइक्रोसॉफ्ट से हालांकि किसी नए टेबलेट की उम्मीद रखनी भी नहीं चाहिए, लेकिन माइक्रोसॉफ्ट ने अभी विंडोज 7 ऑपरेटिंग सिस्टम को टेबलेट्स पर इस्तेमाल करने की योजना स्थगित नहीं की है, क्योंकि एंड्रॉयड में तो यह काम करता ही है। एप्पल आइपैड 3 की उम्मीद अभी न रखिए। अभी वह आइपैड 2 को ही वाहवाही बटोरने देगा।

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