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class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

-फसाद में 355 लोगों पर दर्ज मुकदमे की वापसी के लिए हलफनामा दिया गया-काश! कभी नजर न लगे ऐसी बेमिसाल भाईचारगी को-सात दिन पहले ही तकरीर के दौरान भड़का था उन्माद-प्रशासन भी हुआ कायल, कहा पूरे देश के लिए नजीर मऊ। धीरेन्द्र सिंह मौलानाओं ने यहां तरक्की को नया नजरिया दिया है।

देवबंदी और बरेलवी के बीच तकरीर को लेकर भड़के उन्माद को हल करके अमन की नई राह चुनीं। दोनों पक्षों ने फसाद को लेकर 355 लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने की कवायद कर नजीर पेश की है। हालांकि प्रशासन को कभी नहीं लग रहा था कि ऐसा भी हो सकता है। आम शहरी भी आगे क्या होगा, सोचकर सहमें हुए थे मगर अब सभी बेमिसाल भाईचारगी के कायल हैं।

छोटी-छोटी बात को लेकर यहां हुए दंगे के इतिहास काफी भयावह हैं। लेकिन अब बच्चों की तालीम और कारोबार की तरक्की के लिए लोग ऐसे मामलों पर संजीदा और सतर्क हो रहे हैं। सप्ताहभर पहले जुमे की रात को शहर के चौक पर धार्मिक जलसे में तकरीर के दौरान कुछ बातों को लेकर तकरार इतनी गरमा गई थी कि प्रशासन को हाई अलर्ट करना पड़ा। शासन ने सतर्कता को लेकर समीक्षा शुरू कर दी।

एक-दूसरे पर हमले और पथराव के साथ वाहनों आदि की तोड़फोड़ हुई। बरेलवी की ओर से मदरसा बहरूल ओलूम के प्रधानाचार्य मौलाना अजीजुर्रहमान ने 3 नामजद और 100 अज्ञात के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट लिखाई। जबकि इसी समुदाय के लड्डन खां ने भी 31 लोगों को नामजद और 100 अज्ञात के खिलाफ गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई। बाद में देवबंदी समुदाय के महफुर्जुहसन ने 21 लोगों को नामजद करते हुए 100 अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।

आम लोगों में तरह-तरह का भय छा गया। कारोबारी काम-धंधे को लेकर परेशान थे, जबकि अभिभावक बच्चों की पढ़ाई की चिंता कर रहे थे। इसी दौरान तरह-तरह की अफवाहों के बीच एक इबादत स्थल की चटाई जलने से और दहशत फैल गई।लेकिन कुछ मौलानाओं ने माहौल शांत करने के लिए सिद्दत से पहल शुरू की। फिर प्रशासन और संभ्रात लोग एकजुट हुए और क्षति की भरपाई कराई गई। इसी के साथ तरक्की की एक नई नजीर बनीं कि सभी पक्षों ने मुकदमा वापस लेने के लिए हामी भर दी।

फिर शपथ पत्र तैयार हुआ। मौलाना महफुजुर्रहमान फिफ्ताही ने बताया कि उन्होंने कोतवाल को तीनों शपथ पत्र सौंप दिया है। अब जरूरत है कि प्रशासन भावना को समङो और गंगा-जमुनी तहजीब को आगे बढ़ाए। व्यापारी, बुनकर और युवा वर्ग से लेकर आम शहरी इस पहल से गदगद है। सभी चाहते हैं यह मिशाल हर तरह के विवादों में सभी पक्ष दिखाएं, तो शहर में अमन की बयार और तेज होगी। कई विवादित मसले सुलझ जाएंगे। एसपी ओंकार सिंह का कहना है कि किसी के लिखकर देने से तत्काल मुकदमा वापस नहीं होता।

लेकिन पुलिस इसका सम्मान करती है और कानून के दायरे में निस्तारण कराएगी। ‘शहर में अमन-चैन बना रहे तो, हर सुविधाएं बेहतर होंगी। बच्चों की तालीम और कारोबार को तरक्की मिलेगी। किसी भी सूरत में पुलिस और कोर्ट-कचहरी के चक्कर में पड़े बगैर आपस में ही मसले का हल होना चाहिए। तकरीर को लेकर भड़के उन्माद में दर्ज मुकदमें वापस लेकर पूरे देश को मिशाल पेश की गई है।

’मौलाना मुनीर अहमद शमसी (प्रबंधक, मदरसा अहले सुन्नत बहरूल ओलूम)‘सदर चौक पर देवबंदी के इजलासे आम में तकरीर की कुछ बात को लेकर उपजे तनाव के दिन ही मैने मिल-जुलकर मसले के हल की पहल कर दी थी। धीरे-धीरे लोग अमन-चैन और तरक्की के लिए एकजुट होते गए और अब हमने पुलिस को तीनों मुकदमा वापस लेने का शपथ पत्र दे दिया है। अब जरूरी है कि कोई भी मसला चाहे हिन्दू-मुस्लिम हो या फिरकापरस्ती, उसे मिल बैठकर भाईचारगी से हल किया जाना चाहिए।’ (मौलाना महफुजुर्रहमान मिफ्ताही, इमाम जामा मस्जिद शाही कटरा) धीरेन्द्र सिंह

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  • Web Title:मौलानाओं ने दिया तरक्की को नया नजरिया