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शहर का बेचारा नौजवान मोहित ऐसी बीमारी से ग्रस्त है, जिसका इलाज देश के कुछ चुनिंदा शहरों में भी होना असंभव है। उसकी बीमारी ने पूरे परिवार को आर्थिक रूप से बीमार कर दिया है। यूरोपीय देशों की बीमारी ‘विल्सन्स’ भारत में एक लाख लोगों में इक्का-दुक्का लोगों में पाई जाती है।

18 वर्ष के इस युवक की हालत यह हो गई है कि वह अब न ठीक से बोल सकता है और न ही चल सकता है। दरअसल धर्मशाला रोड निवासी प्रमोद कुमार तथा प्रभा देवी का इकलौता बेटा मोहित एक दशक से इसखतरनाक बीमारी से ग्रस्त है। बेटे की बीमारी के कारण आई तंगी से मां की ममता हारने लगी है। बेटे की लगातार बिगड़ती हालत से पूरा परिवार हताश है।

मोहित को यह बीमारी तब हुई जब वह महज 7 वर्ष का था। इसके बाद से मोहित का शरीर क्षीण होता गया। पूरे बदन में तेज कंपन्न हो रहा है। बुद्धि मंद पड़ रही है। आवाज लड़खड़ाने लगी है। चलते वक्त कब अनियंत्रित होकर गिर जाए इसकी कोई गारंटी नहीं। डॉक्टरों ने संकेत दे दिये है कि मोहित का हृदय तथा मस्तिष्क काफी धीमी गति से काम कर रहा है। मोहित का इलाज स्थानीय स्तर से लेकर वेल्लूर तथा दिल्ली व रांची के डॉक्टरों से कराया जा चुका है।

इलाज में लाखों रुपये खर्च हुए, पैसे जुटाने में मोहित के माता-पिता ने जमीन तथा जेवर बेच दिये। पिता प्रमोद कुमार की वर्षो पुरानी मिठाई दुकान भी तंगी के कारण बंद हो गई। अपने भाई के इलाज के खातिर दो बहनों ने टयूशन पढ़ाना शुरु कर दिया है। महंगा इलाज होने के कारण ये सारी कमाई कम पड़ रही है। मोहित के माता-पिता ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मदद की गुहार लगाई है।

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  • Web Title:यूरोपीय बीमारी का शिकार हुआ किशनगंज का मोहित