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हैदराबाद में डॉक्टरों की हड़ताल, 8 बच्चों की मौत

हैदराबाद में डॉक्टरों की हड़ताल, 8 बच्चों की मौत

आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद के एक सरकारी अस्पताल में सुरक्षा इंतजाम की मांग को लेकर जूनियर चिकित्सकों की हड़ताल रविवार को भी जारी रही, जबकि अस्पताल में कम से कम आठ बच्चों की मौत हो गई।

एक अधिकारी ने बताया कि राज्य में बच्चों के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल निलोफर अस्पताल में जूनियर चिकित्सकों ने शनिवार शाम से आपातकालीन सेवाओं का भी बहिष्कार कर दिया। इस दौरान आठ बच्चों की मौत हो चुकी है।

इनमें पांच बच्चों की मौत गहन चिकित्सा केंद्र (आईसीयू) में हुई जबकि तीन ने आपातकालीन वार्ड में दम तोड़ दिया। हड़ताल पर बैठे चिकित्सकों का कहना है कि बच्चों की मौत उनकी हड़ताल की वजह से नहीं हुई है बल्कि उनका कहना है कि विभिन्न वजहों से अस्पताल में रोजाना 10 बच्चों की मौतें होती हैं।

निलोफर अस्पताल में 400 स्नातक और स्नातकोत्तर के चिकित्सकों ने सभी तरह के चिकित्सकीय सेवा का बहिष्कार कर दिया है। वे 10 दिनों से हड़ताल पर हैं, लेकिन अब तक उन्होंने आपतकालीन सेवाओं को इसके दायरे से बाहर रखा था।

मरीजों के परिजनों द्वारा हमले की घटनाओं के मद्देनजर सरकार से 24 घंटों के लिए सुरक्षा इंतजाम की मांग को लेकर हैदराबाद में गांधी, उस्मानिया और अन्य सरकारी अस्पतालों में जूनियर चिकित्सक हड़ताल पर हैं। इसके साथ ही वारंगल के एमजीएम अस्पताल में भी चिकित्सक हड़ताल पर हैं।

निलोफर अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि पिछले साल उनकी हड़ताल के बाद विशेष सुरक्षा बल तैनात किए गए थे, जिन्हें बाद में हटा लिया गया। उधर, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सरकार की तरफ से बजट मुहैया न कराए जाने के कारण सुरक्षाबलों को हटा दिया गया।

इस बीच, हड़ताल समाप्त करने की अपील करने गए चिकित्सा शिक्षा के निदेशक रवि राज को हड़ताली चिकित्सकों की नाराजगी झेलनी पड़ी। उन्होंने कहा कि सरकार ने एक समिति का गठन किया है जो सुरक्षा इंतजाम की मांग पर फैसला करेगी।

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