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13 मई के बाद उमा की भाजपा में वापसी

13 मई के बाद उमा की भाजपा में वापसी

केन्द्र की सत्ता में वापसी की आस में भाजपा ने उत्तरप्रदेश में अपने खोए आधार को फिर से पाने के लिए हिन्दुत्व की शक्तियों के साथ पिछड़ी जातियों को लामबंद करने की महत्वकांक्षी योजना बनाई है।
इसके लिए राज्य से कोई पात्र नेता न मिलने पर उसने तेज तर्रार साध्वी और करिश्माई नेता उमा भारती को चुना है। पांच राज्यों में हुए विधानसभा के चुनावों के 13 मई को नतीजे आ जाने के बाद उमा की घर वापसी कभी भी हो सकती है।

भाजपा नेताओं का कहना है कि अगर सवर्णों और अन्य पिछड़े वर्गों का परंपरागत मतदाता पार्टी की ओर फिर से लौट आया तो वह राज्य में 20 प्रतिशत वोट के लक्ष्य को पार कर राज्य ही नहीं राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी नैया पार लगा सकती है।

पार्टी का मानना है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में अपनी संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए अगले साल राज्य में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में भाजपा का अच्छा प्रदर्शन करना आवश्यक है। भाजपा सूत्रों ने कहा कि उमा की घर वापसी के रास्ते की बाधाएं दूर हो गई हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस बात के लिए आश्वस्त किया जा चुका है कि उमा उनके राज्य की सरकार या पार्टी इकाई के मामलों में कोई दखल नहीं देंगी।

सूत्रों ने हालांकि यह भी स्वीकार किया कि उत्तरप्रदेश की पार्टी इकाई के कई लोग दूसरे प्रदेश से नेता आयात करने के फैसले से खुश नहीं हैं। उन्हें आशंका है कि इस निर्णय से और समस्याएं ही पैदा हो सकती हैं। वैसे उत्तरप्रदेश भाजपा अध्यक्ष सूर्य प्रताप साही ने कहा है कि उमा समाज के कुछ वर्गों का प्रतिनिधित्व करती हैं और अगर वह उत्तरप्रदेश आती हैं तो निश्चित तौर पर पार्टी उस वोट बैंक का विश्वास जीतने में सफल होगी।

कल्याण सिंह के पार्टी छोड़ने के साथ उत्तरप्रदेश में पार्टी ने एक जन नेता के साथ पिछड़े वर्गों, खासकर लोध वोट बैंक को भी खो दिया है। पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी और संसदीय दल के अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी का मानना है कि उमा प्रदेश में इस कमी को दूर कर सकती हैं। वह जन नेता होने के साथ ही लोध हैं। इसके साथ ही वह हिन्दुत्व की करिश्माई नेता भी हैं।

पार्टी सूत्रों ने कहा कि भ्रष्टाचार के मुद्दों पर कांग्रेस के बुरी तरह घिर जाने और इन मामलों में बचने के लिए उसका बार-बार बसपा से हाथ मिलाने से, कम से कम उत्तरप्रदेश में कांग्रेसी नेता राहुल गांधी की सारी करिश्माई निकल गई है।

पार्टी सूत्रों ने माना कि नेहरु गांधी परिवार के भाजपाई नेता वरूण गांधी की अपनी सीमाएं हैं। उनमें सबको साथ लेकर चलने की कमी है। वह बड़े जन नेता के रूप में भी उभर नहीं पाए हैं। ऐसे में भाजपा के पास उमा ही सबसे अच्छा विकल्प हैं। उनके अनुसार, उमा जन नेता हैं। करिश्माई हैं। तेज तर्रार हैं। पिछड़ों की नेता हैं। हिन्दुत्व की नेता हैं।

भाजपा के नेताओं ने कहा कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने बहुत सोच-विचार करके उत्तरप्रदेश में भाजपा की किस्मत फिर से चमकाने की जिम्मेदारी उमा को सौंपने की सोची है। उसका मानना है राष्ट्रीय स्तर पर अगर कांग्रेस को मात देनी है तो 2014 से पहले भाजपा को उत्तरप्रदेश में अपनी खोई साख को पाना जरूरी है।

कर्नाटक को छोड़कर शेष दक्षिण भारत और पश्चिम बंगाल में भाजपा की पैठ ऐसी नहीं है कि उसके सहारे दिल्ली की गद्दी हासिल की जा सके। कांग्रेस भाजपा की इसी कमी के चलते बाजी मार जाती है। पार्टी सूत्रों का कहना है इस कमी को दूर करने के लिए भाजपा ने उत्तरप्रदेश में जोरदार वापसी की महत्वकांक्षी योजना बनाई है और उमा भारती इसकी मजबूत कड़ी हैं।

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