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बदलें सोना-चांदी के प्रति नजरिया

सोना-चांदी देश में सदियों से लोगों की पसंद रहा है। यह अलग बात है कि यह जेवरों के रूप में होता था और खरीदने का नजरिया कभी भी निवेश का नहीं होता था। लेकिन अब जेवर की बात पीछे छूट गई है और इसने निवेश का रूप ले लिया है। ऐसे में जरूरी है कि इसकी खरीदारी समझदारी से की जाए।

सोना या चांदी खरीदने के बाद रखना भी एक दिक्कत है। थोड़ा बहुत हो ठीक है, लेकिन अगर किसी ने ज्यादा निवेश कर रखा है तो बैंक का लॉकर लेना ही उचित लगता है। यहां पर लोगों को लॉकर का किराया चुकाना पड़ता है।

कायदे से देखें तो यह लोगों का अतिरिक्त खर्च है। इसके अलावा इसको बचने वक्त लॉकर से निकाल कर सुनार के यहां तक ले जाना पड़ता है जिसके कुछ खतरे हैं। अंत में सुनार कुछ कटौती के बाद ही इसे खरीदता है जिससे फायदा कुछ कम हो जाता है।

इसलिए अगर सोने में निवेश करना है तो दूसरे तरीके ही बेहतर हैं। लेकिन पहले यह तय कर लें कि आपको निवेश वाले सोने की कभी भौतिक रूप से जरूरत पड़ेगी या नहीं। अगर नहीं पड़ेगी तो गोल्ड ईटीएफ या गोल्ड म्यूचुअल फण्ड बेहतर विकल्प हैं।

लेकिन आपको लगता है तो कभी इसकी जरूरत पड़ सकती है तो नेशनल स्पाट एक्सचेंज में इसकी खरीदारी की जा सकती है। यहां पर सोना मिलेगा तो डीमैट में ही लेकिन अगर आप चाहेंगे तो यह भौतिक रूप से पूर्ण शुद्ध सोना पा सकते हैं। इस सोने का बाद में आप जैसा चाहें इस्तेमाल कर सकते हैं।

यह तो रही निवेश के तरीके की बात, लेकिन सोना और चांदी के दाम में जिस तरह से उठापटक देखी जा रही है उसके आधार पर इनके दाम के बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि थोड़ा थोड़ा करके या हर माह सिप के माध्यम से निवेश करें।

अगर किसी ने यह तरीका अपनाया होता तो उसने चांदी 75 हजार पर भी ली होती तो अब 60 हजार पर भी खरीद रहा होता। ऐसे में कुछ ही समय में उसके निवेश की वैल्यू काफी कम हो जाएगी और बाजार में इन चीजों के दाम काफी ज्यादा। और यह फर्क जितना बढ़ता जाएगा लोगों का फायदा उतना ही बढ़ता जाएगा। इसलिए जरूरी है कि योजना बना कर निवेश शुरू करें और लम्बे समय तक इसे चलाएं।

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  • Web Title:बदलें सोना-चांदी के प्रति नजरिया