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जनता के फैसला पर बाबूलाल ने अनशन तोड़ा

झाविमो अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने शनिवार को जनता के फैसले पर सात दिनों से जारी आमरण अनशन समाप्त कर दिया। हरमू की विस्थापित महिला धर्मी देवी ने जूस पिला कर अनशन तोड़वाया।

मोरहाबादी में आयोजित जन अदालत में लड़ाई जारी रखने के लिए अनशन समाप्त करने का फैसला सुनाया गया। प्रभावितों ने कहा कि सरकार गांधीवादी तरीके से बातों को सुनने वाली नहीं है। इसके लिए सुभाष चन्द्र बोस, वीर कुंवर सिंह जैसे युवाओं को कमर कसना होगा। आंदोलन को शहरों एवं गांवों में ले जाना होगा। जन अदालत के फैसले पर मरांडी ने विस्थापितों की लड़ाई को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ अनशन समाप्त किया।

गरीबी को नजदीक से देखा हूं: मरांडी
जन अदालत में अपनी पीड़ा सुनाते हुए मरांडी ने कहा कि उन्होंने गरीबी को नजदीक से देखा है। जब वह बच्चा थे तो भादो के महीने में भुटा खाकर रहते थे। ठंडा के दिनों में गरम वस्त्र नहीं होने के कारण मां पुआल में सुला दिया करती थी।

विस्थापन और अतिक्रमण झारखंड की जटिल समस्या बन चुकी है। पुनर्वास के बिना लोगों को बेघर कर देना उचित नहीं है। इसे देखकर बड़ी पीड़ा होती है। अलग राज्य बनने के बाद सोंचता था कि जो दिन बचपन में मैंने देखा है वह अब यहां के गरीबों को नहीं देखना पड़ेगा।

जन अदालत का फैसला
बाबूलाल मरांडी अनशन समाप्त कर गरीबों के लिए आंदोलन जारी रखें।
अतिक्रमण हटाओ अभियान की तरह हाईकोर्ट के अन्य आदेशों का भी पालन हो।
राज्यपाल सरकार को बर्खास्त कर अविलंब चुनाव कराने की अनुशंसा करें।
भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने के लिए राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ा जाए।
सरकार विकास के नाम पर विस्थापित लोगों की अनदेखी करना बंद करे। 

क्या थी मांगें
पुनर्वास एवं विकास प्राधिकार का गठन
बुलडोजर चलाना तत्काल बंद करने
पुनर्वास नीति स्पष्ट करने, अध्यादेश लाने
विधानसभा का विशेष सत्र शीघ्र बलाने
अनुपयोगी जमीन रयैतों को वापस करने

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