DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

माओवादियों का फरमान, नहीं होगा पुल निर्माण

माओवादियों ने झारखंड-छत्तीसगढ़ सीमा पर अवस्थित मोकरा और मरियमटोली के पास शंख नदी पर पुल का निर्माण नहीं होने देने का फैसला किया है। इस संबंध में चैनपुर के कुरुमगढ़ इलाके में माओवादियों के सबजोनल कमांडर बुधेश्वर उरांव के नेतृत्व में बैठक हुई थी।

माओवादियों का मानना है कि पुल बन जाने से झारखंड के गुमला-सिमडेगा जिले के अलावा छत्तीसगढ़ पुलिस उनके पनाहगाह में आसानी से पहुंच जाएगी। इससे क्षेत्र में उनकी पकड़ कमजोर पड़ जाएगी। विकास के लिए इन पुलों का निर्माण जरूरी है।

माओवादियों के फरमान से इलाके की 50 हजार की आबादी मायूस नजर आ रही है। जानकारी के मुताबिक झारखंड-छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती गांवों (गुमला-सिमडेगा जिला) में माओवादियों की समानांतर सरकार चलती है। यहां जंगलों के बीच बसे छोटे-बड़े पठार माओवादियों के आश्रय स्थल हैं।

इस इलाके में पुलिस का आना-जाना भी काफी कम होता है। पुल के अभाव में कोंडरा-मोकरा इलाके में लगभग 50 गांव बरसात में गुमला जिला मुख्यालय से कट जाते हैं। छत्तीसगढ़ के रास्ते भी इलाके में पहुंचना काफी दुश्कर साबित होता है। यह बात माओवादियों के पक्ष में जाती है। जिला प्रशासन ने सीमावर्ती गांवों के चहुमुंखी विकास के लिए मोकरा में 2.22 करोड़ और शंख नदी पर मरियमटोली के समीप 3.88 करोड़ की लागत से करीब दो वर्ष पूर्व नदी पर पुल निर्माण शुरू किया था।

निर्माण की जिम्मेवारी ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल को सौंपी गई थी। संबंधित ठेकेदारों ने कुछ कार्य भी किया। लेकिन माओवादियों ने पूर्व में ही हिंसात्मक और विध्वंसात्मक कार्रवाईयों के जरिए पुलों का निर्माण ठप करा दिया था। डीसी राहुल शर्मा इस पिछड़े क्षेत्र के विकास के प्रति गंभीर हैं और दोनों पुलों के निर्माण को आवश्यक बताते हैं। उन्होंने ठेकेदारों को पुलिस बल उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। लेकिन अबतक इसके लिए ठेकेदार सामने नहीं आया है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:माओवादियों का फरमान, नहीं होगा पुल निर्माण