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समा कुछ ऐसा कि फिर भरा बाबूलाल में स्फूर्ति

शनिवार को दिनभर मोरहाबादी मैदान के पास गहमागहमी रही। झाविमो कार्यकर्ताओं के जत्था का आना-जाना दिनभर लगा रहा। झाविमो नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के अलावा भी बहुत ही संख्या में ऐसे भी लोग थे, जो अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान बेघर हो चुके हैं या फिर जिन्हें ऐसा हो जाने का एक अंदेशा मन में समाया हुआ है।

सुबह 11 बजे से ही मोरहाबादी मैदान में लोगों का आना-जाना प्रारंभ हो चुका था। इसमें महिलाओं की भागेदारी काफी अच्छी थी। यहां मौजूद लोगों के मन में बाबूलाल एक उम्मीद का किरण थे। ज्यादातर लोगों का कहना था कि बाबूलाल इस आंदोलन में हीरो बनकर उभरे हैं। चाहे उनका आदोलन राजनीतिक लाभ कमाना ही हो, मगर इस विपरीत घड़ी में वे लोगों के दुख-दर्द में मरहम लगाने का काम तो जरुर कर रहे हैं।

पालिटिकल माइलेज तो बाबूलाल ले ही गये हैं। हार्डकोर समर्थकों का कहना था कि झारखंड का एक ही लाल, बाबूलाल। वहीं कम पढ़े-लिखे तथा अनपढ़ों के बीच यही चर्चा होती रही कि बाबूलाल उन लोगों के रहनुमा बनकर आये हैं, जिन्हें बेघर कर दिया गया है। इस समा ने बाबूलाल में फिर स्फूर्ति का मंजर जरूर पैदा किया होगा।

हिन्दुस्तान संवाददाता राणा गौतम ने ऐसे लोगों की मनोभावना को समझने की कोशिश की। दिनभर वहां का जायजा लिया।

समय- 12.45 बजे
नागा बाबा खटाल संघर्ष मोर्चा का जुलूस मोरहाबादी मैदान पहुंचा। मनोहर यादव जुलूस का नेतृत्व कर रहे थे। इसी समय खटाल विकास परिषद के सदस्य केएन भगत के नेतृत्व में वहां पहुंचा। मनोहर यादव के नेतृत्व में काफी संख्या में नागा बाबा खटाल से विस्थापित महिला तथा पुरूष शामिल थे।

समय-12.50 बजे
झाविमो नेता तथा शहर के डिप्टी मेयर अजय नाथ शाहदेव का जत्था मोरहाबादी मैदान पहुंचा। जुलूस में बड़ी संख्या में युवा वर्ग की भागेदारी थी। मंच पर बैठे झाविमो नेताओं ने तालियां बजाकर श्री शाहदेव का अभिवादन किया। बाबूलाल मरांडी को हाथ जोड़ते हुए श्री शाहदेव मंच पर चढ़े।

समय- एक बजे
इस्लामनगर नवजवान कमेटी की अगुवाई में इस्लामनगर से बेघर हुए सैंकड़ों लोग जन अदालत में आये। इनके हाथों में तख्तियां थीं, जिनपर लिखा हुआ था., सरकार पुनर्वास करो या इस्तीफा दो।

समय 1.10 बजे
पहाड़ीटोला संघर्ष समिति के सदस्य जुबेर आलम की लीडरशीप में मोरहाबादी मैदान आये। वहां पहुंचे लोग अजरुन मुंडा की सरकार मुर्दाबाद-मुर्दाबाद, सरकार हाय-हाय जैसे नारे लगा रहे थे।

दोपहर 1.15 बजे-
झाविमो विधायक दल के नेता प्रदीप यादव पार्टी सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी को मंच स्थल पर लाने के लिए धरनास्थल पर गये। बाबूलाल पार्टी में दादा के उपनाम से चर्चित समरेश सिंह तथा प्रदीप यादव के साथ दोपहर 1.20 बजे मंच स्थल पर आये। लोगों ने लगातार पांच मिनटों तक तालियां बजाकर बाबूलाल का स्वागत किया। उजला कुर्ता-पाजामा पहने बाबूलाल ने हलकी मुस्कुराहट के साथ वहां मौजूद लोगों का अभिवादन स्वीकार किया।

दोपहर 1.30 बजे-
पार्टी कार्यकर्ता संतोष तथा साथियों के नेतृत्व मेंमहात्मा गांधी की पसंदीदा भजन रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम का गायन किया गया। बताते चलें कि एक मई को बाबूलाल मरांडी ने इसी भजन के बाद अपना आमरन अनशन प्रारंभ किया था।


दोपहर 1.40 बजे-
पतरातू से विस्थापित हुए संजय सिंह के नेतृत्व में सैंकड़ो लोग चूड़ा-गुड़ की पोटरियां लेकर मोरहाबादी मैदान पहुंचते हैं। आते ही नारे लगाने लगते हैं-झारखंड का एक ही लाल-बाबूलाल, बाबूलाल, सरकार होश में आओ, गरीबों के ऊपर गोलियां चलाना बंद करो।

दोपहर 2.10 बजे-
दामोदर महतो की अगुवाई में रामगढ़ तथा हजारीबाग इलाके से करीब पचास लोग हाथ में बैनर-पोस्टर लेकर मंच के पास आते हैं। सभी नारे लगाते हैं-बाबूलाल तुम मत घबड़ाना, तुम्हारे साथ झारखंड का सारा जमाना। कार्यकर्ता काफी उत्साहित दिखे। आपस में बतियाते हैं- नेता हो तो बाबूलाल मरांडी जैसा। महिला मोर्चा की ओर से संगीता प्रभात भी अपने समर्थकों के साथ पहुंची।

दोपहर 2.20 बजे-
प्रतिपक्ष के नेता मंच से घोषणा करते हैं- अब नेता नहीं बोलेंगे। जो अतिक्रमण हटाओ अभियान से बेघर हुए हैं, वे अपनी व्यथा सुनायेंगे। उनका दर्द हमें सुनना है। प्रदीप के बाद प्रभावितों में इस्लामनगर के मोहम्मद खलील, एचइसी के कुमुद झा, पहाड़ीटोला के जुबेर आलम, नागाबाब खटाल के मनोहर यादव, कुटे के  लाल काशीनाथ शाहदेव, कचहरी मार्केट दुकानदार संघ के धनंजय सिंह, बोकारो के अब्दुल मल्लिक, जमशेदपुर छियासी बस्ती के डीएन सिंह आदि ने अपनी-अपनी पीड़ा बतायी, मगर बाबूलाल मरांडी से इस मुद्दे पर लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहने के लिए आमरन अनशन तोड़ने की मिन्नतें की।

दोपहर 3.00 बजे-  हरमू झोपड़ी मोहल्ला से बेघर हुई धरमी देवी को मोरहाबादी मैदान झाविमो के कुछ कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचती है। काफी उम्र है करीब 65 साल। झाविमो कार्यकर्ता उन्हें मंच के दाहिने ओर बने पंडाल में बिठाते हैं। उन्हें नींबू पानी पिलाया जाता है।

दोपहर सवा तीन बजे- मैदान के एकदम दाहिने ओर दादा पार्क के समीप खड़े करीब दो दजर्न लोग आपस में बतिया रहे हैं। एक सज्जन ने कहा-बाबूलाल ने गांधीगिरी अपना लिया है। कमाल का आंदोलन कर रखा है। उनकी बातों को कुछ ने काटते हुए कहा- अरे सभी नेता एक ही चट्टे-बट्टे एक होते हैं। सिर्फ पालिटिकल माइलेज गेन करने के लिए बाबूलाल ने यह सब किया था। जो मंशा उनकी थी, पूरी हो गयी है। 

दोपहर सवा तीन से पौने पांच बजे तक- झाविमो के कई विधायक तथा पदाधिकारीकण मंच से संबोधित करते हैं। इसमें डा शबा अहमद, ढुल्लु महतो, निजामुद्दीन अंसारी, केपी राय, समरेश सिंह, राजीव रंजन मिश्र जैसे नेताओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए राज्य सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए पार्टी सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी से अपना आमरन-अनशन तोड़ने की अपील करते हैं।

शाम पौने पांच से पांच बजे- पार्टी विधायक दल के नेता प्रदीप यादव एक बार फिर माइक संभालते हैं। उपस्थित जनता से कहते हैं- जनअदालत का फैसला यह है कि लंबी लड़ाई तथा आंदोलन को जन-जन तथा गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए बाबूलाल को अपना आमरन अनशन तोड़ देना चाहिए। उन्होंने मौजूद लोगों से पूछा-क्या जनता का फैसला यही है। यही फैसला है तो आपलोग अपने अपने हाथ उठायें। सभी के हाथ आसमान की ओर उठ जाते हैं। लोगों ने शायद अपना फैसला सुना दिया हो। चारों ओर तालियों की गड़गड़ाहट गूंजने लगती है। पार्टी कार्यकर्ताओं के चेहरे पर मुस्कुराहट तैर जाती है।

शाम पांच बजकर दस मिनट- बाबूलाल मरांडी से कहा जाता है कि वह अपने स्थान से ही अपने विचार व्यक्त करें। वह मना कर देते हैं। कहते हैं-जब राज्य की जनता छह घंटे से चिलचिलाती धूप में बैठ सकती है तो क्या वह उठकर भाषण नहीं दे सकते। उसके बाद वह माइक संभाल लेते हैं। महज दस मिनट के भाषण के दौरान कहते हैं- आपका निर्णय शिरोधार्य है। मगर एक निवेदन है कि यह आंदोलन की शुरुआत है। इसमें साथ दें। शहीदों की कुर्बानियों को व्यर्थ जाने नहीं देंगे। तब तक हम चैन से नहीं रहेंगे।

शाम 5.22 बजे- हरमू चौक झोपड़ी मोहल्ला की रहने वाली बाबूलाल को नींबू का पेय पदार्थ (डिब्बा बंद ) पिलाती है। इस प्रकार बाबूलाल मरांडी का सात दिनों से चला आ रहा आमरन-अनशन समाप्त होता है। चारों ओर से बाबूलाल मरांडी जिंदाबाद-जिंदाबाद का नारे लगने लगते हैं।

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