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सांध्यकालीन अदालतें मील का पत्थर: मुख्य न्यायधीश

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति फरदीनो इनासिया रिबैला ने कहा कि उप्र में वकीलों की हडताल के कारण प्रदेश के न्यायालयों में 65 लाख से भी अधिक मुकदमें लाम्बित है ऐसे में सांध्यकालीन अदालतें मील का पत्थर साबित होगी।

न्यायमूर्ति रिबैला हापुड न्यायालय में संध्याकालीन अदालत के उद्घाटन समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सांध्यकालीन अदालतों से जहां एक और जनता को फायदा होगा वही दूसरी ओर युवा अधिवक्तों को भी फायदा होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश की अधीनस्थ न्यायालायों में 50 लाख सत्र न्यायालयों में पांच लाख व उच्च न्यायालयों में 10 लाख से भी ज्यादा मुकदमें लम्बित है। आज अदालतों में लगभग 6 लाख 68 हजार से भी ऊपर फैजदारी के मुकदमें लम्बित है। जिनका निस्तारण लम्बे समय से लटका हुआ है।
   
उन्होंने कहा कि इन मुकदमों को सांध्य कालीन अदालतों में भेजने का बड़ा फायदा यह होगा कि वे तेजी से समाप्त होंगे और नियमित अदालतों में चल रहें गंभीर प्रकृति के मुकदमों की सुनवाई आसानी व सही प्रकार से हो सकेंगी।

मुख्य न्यायधीश ने कहा कि वकालत का उद्देश्य पैसा कमाना नहीं बल्कि न्याय दिलाना होना चाहिए। वकील व्यवसायिकता को त्यागकर कानून की सेवा करें और आम जनता को न्याय दिलवाना चाहिए।

गाजियाबाद जनपद के प्रशासनिक न्यायधीश न्यायमूर्ति प्रकाश कृष्णा ने कहा कि संध्याकालीन अदालतों से जनता को लाभ मिलेगा। संध्याकालीन अदालत सुबह या शाम को केवल 2 घंटे ही लगेगी तथा इसमें केवल चालानी मुकदमों का ही निस्तारण किया जाएगा।

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