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20 फरवरी, 2020|7:09|IST

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बहुचान के स्वाभिमान से परशानी क्यों?

मुख्यमंत्री मायावती ने सोमवार को यहाँ प्रेस कांफ्रेंस में कहा विपक्षी दल और मीडिया का एक तबकाोातिवादी मानसिकता से ग्रस्त है। इसलिए कोई मुद्दा नहीं मिलता तो विपक्षी पार्टियाँ आपस में मिल कर लखनऊ में बनाएोा रहे अम्बेडकर और कांशीराम स्मारकों के औचित्य पर सवाल खड़ा कर मीडिया की मार्फत दुष्प्रचार कर यह भ्रम फैलाती हैं। मानो सरकार सिर्फ इसी काम मेंोुटी है। पूरा सरकारी धन इन्हीं स्मारकों पर खर्च हो रहा है और विकास के काम ठप हैं। यह पूछेोाने पर कि औरैयाोिले के बसपा अध्यक्ष योगेन्द्र दोहर को क्यों हटाया गया, मुख्यमंत्री ने कहा किोिस विषय पर प्रेस कांफ्रेंस बुलाई गई है उससेोुड़े सवालों केोवाब ही वे देंगी। इस सवाल पर कि लखनऊ में बन रहे अम्बेडकर और कांशीराम स्मारकों पर अब तक कितनी रकम खर्च हो चुकी है, मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके अफसरों को आवेदन देकर पूछने परोवाब मिलोाएगा।ड्ढr मुख्यमंत्री ने कहा किोब विपक्षी दल सत्ता में थे तो उन्होंने भी अपने नेताओं और महापुरुषों की याद में सरकारी खर्चे से अरबों-खरबों के काम कराए। कांग्रेस ने नेहरू-गांधी परिवार के नाम पर देश में हरोगह स्मारक बनवाए। नई दिल्ली में तीन मूर्ति भवन और सफदरांग रोड ौसे सरकारी भवन स्मारक बना दिए गए। कांग्रेस ने अपने नेताओं के सम्मान में यमुना नदी के किनार अरबों रुपए कीोमीन पर कई समाधियाँ बनवा दीं तब किसी ने सवाल नहीं उठाया। भाापा ने भी अपनी सरकारों में कई प्रदेशों में चौराहों पर मूिर्तयों से लेकर पार्क और संग्रहालय बनवाए। सपा ने डॉक्टर लोहिया के नाम से पार्क और स्मारक बनवाए। लोहिया के नाम पर लखनऊ में एसा लोहिया साइकिल पथ बनवायाोिस पर कोई साइकिल भी नहींोाती।ोब मेरी सरकार बहुान समाा मेंोन्मे संतों-महापुरुषों को सम्मान देने के लिए यही काम करती है तो उसे सरकारी धन का बेाा इस्तेमाल बतायाोाता है।ड्ढr उन्होंने कहा कि वह समाा की सबसे छोटीोाति-अनुसूचितोाति में पैदा हुई हैं। मुख्यमंत्री का पद उन्हें विरासत में नहीं बल्कि दबे-कुचले समाा मेंोन्मे संतों-महापुरुषों केोीवन संघर्ष व प्रेरणा, अपने खुद के संघर्ष और बसपा सेोुड़े लोगों की मदद से मिला है।ड्ढr

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  • Web Title: बहुचान के स्वाभिमान से परशानी क्यों?