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गायक बनना चाहता था, बन गया गीतकार : भट्टाचार्य

गायक बनना चाहता था, बन गया गीतकार : भट्टाचार्य

गीतकार अमिताभ भट्टाचार्य 'इमोशनल अत्याचार', 'एंवेई एंवेई' और 'अली रे' जैसे गीतों से बॉलीवुड की फिल्मों के गीत लेखन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ले आए हैं। वह कहते हैं कि उन्होंने कभी भी गीतकार बनने के लिए नहीं सोचा था और वह लखनऊ से यहां गायक बनने के लिए आए थे।

भट्टाचार्य ने 11 साल पहले बॉलीवुड में शुरुआत की थी। उन्होंने बताया कि ऐसा नहीं था कि मैं बॉलीवुड के गीत लेखन में बदलाव लाना चाहता था। ऐसा इसलिए हुआ कि मेरे पास जिन फिल्मों के प्रस्ताव आए, उनमें इस तरह के गीतों की आवश्यकता थी।

उन्होंने बताया कि मेरी व्यक्तिगत सोच यह है कि जब मैं कोई फिल्म करता हूं तो उसकी पटकथा और संवादों को पूरी तरह पढ़ता हूं क्योंकि मेरे लिए यह जानना जरूरी होता है कि फिल्मी किरदारों की बोलचाल की भाषा क्या है।

भट्टाचार्य कहते हैं कि मैं गायक बनने के लिए मुम्बई आया था और दुर्घटनावश गीतकार बन गया। मैंने इससे पहले कभी गीत नहीं लिखे थे। मैं संगीत बनाता था और अभ्यास के लिए गीत लिखता था और फिर मैं गीतकार बन गया। इसलिए मैं खुद को अच्छा गीतकार साबित करने के लिए कोई दबाव महसूस नहीं करता।

उन्होंने कहा कि सुरों की मधुरता मुझे प्रेरित करती है और मेरे 99 प्रतिशत गीत धुनों पर आधारित हैं। जब मैं कोई गीत गुनगुनाता हूं तो स्वाभाविक रूप से बोल निकलने लगते हैं। भट्टाचार्य ने 'आमिर', 'देव डी', 'चांस पे डांस', 'हाउसफुल', 'बैंड बाजा बारात' और 'नो वन किल्ड जेसिका' जैसी फिल्मों के गीत लिखे हैं।

उन्होंने हाल ही में यशराज बैनर की फिल्म 'लव का दी एंड' के गीत लिखे हैं। उनके लिखे गीत 'द मटन सांग' के बोल लोगों को खूब आकर्षित कर रहे हैं। भट्टाचार्य अब तक पूर्णकालिक गायक तो नहीं बन पाए हैं लेकिन उन्होंने 'वेक अप सिड' का 'इकतारा' और 'बैंड बाजा बारात' का 'मितरा' गीत गाया है।

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