DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

टैगोर की याद में अंतरराष्ट्रीय पुस्कार व फेलोशिपः मनमोहन

टैगोर की याद में अंतरराष्ट्रीय पुस्कार व फेलोशिपः मनमोहन

विश्व बंधुत्व, मानवता तथा प्रेम का संदेश देने वाले गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की स्मृति में हर साल एक बडी़ हस्ती को अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार दिया जाएगा तथा सांस्कृतिक शोध के लिए एक राष्ट्रीय फेलोशिप शुरू करने के साथ ही विश्व भारती की ऐतिहासिक गरिमा भी बहाल की जाएगी।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में गुरुदेव की 150वीं जयंती के उद्घाटन समारोह में गुरुदेव को बहुआयामी प्रतिमा संपन्न लेखक, कवि, चित्रकार और दार्शनिक बताते हुए यह घोषणा की। उद्घाटन समारोह में बंगलादेश के योजना मंत्री एयर वाइस मार्शल (रिटार्यड) ए.के. खांडकर विशिष्ट अतिथि थे जबकि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) एवं कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी मुख्य अतिथि थी। समारोह में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी, विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा, मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी, संस्कृति मंत्री कुमारी सैलजा तथा भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के अध्यक्ष कर्ण सिंह भी मौजूद थे।

प्रधानमंत्री ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि टैगोर एक ऐसे कलाकार थे जो विश्व बंधुत्व की भावना में यकीन रखते थे और उनका संबंध विलियम बटलर ईट्स, रोमा रोलां तथा अल्बर्ट आइन्सटीन जैसे मेधावी लोगों से था। उन्होंने अपनी लेखनी तथा कला के जरिए अंतरराष्ट्रीय भाईचारे का प्रचार-प्रसार किया। गांधी जी के शब्दों में गुरुदेव राष्ट्रीय आंदोलन की नैतिक ताकत तथा वंचितों की प्रभावशाली आवाज भी थे।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार गुरुदेव की 150वीं जयंती के मौके पर उनकी स्मृति में एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार शुरू कर रही है ताकि अंतरराष्ट्रीय भाईचारा एवं बंधुत्व को बढा़वा देने में उनके योगदान को रेखांकित किया जा सके। पुरस्कार का चयन प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में गठित जूरी करेगी जो ऐसे व्यक्ति को पुरस्कृत करेगा जिनका जीवन एवं कार्य टैगोर के विश्वबंधुत्व को प्रतिविंबित करता हो। पहला पुरस्कार टैगोर की 150वीं जयंती के अंत तक दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि संस्कृति के क्षेत्र में उच्च कोटि के शोध के लिए टैगोर की स्मृति में एक राष्ट्रीय फेलोशिप भी शुरू की जा रही है जिसके अंतर्गत नामी-गिरामी विद्वान अल्पज्ञात एवं अज्ञात सांस्कृतिक स्रोतों के बारे में शोध करेंगे। प्रधानमंत्री ने इसके लिए देश, विदेश के विद्वानों को आगे आकर शोध करने का निमंत्रण भी दिया।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:टैगोर की याद में अंतरराष्ट्रीय पुस्कार व फेलोशिपः मनमोहन