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गाय के खून ने बचाई जख्मी महिला की जान

सुनकर भले ही कानों पर यकीन न हो, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में पिछले दिनों गाय के खून ने वाकई एक महिला को नया जीवन दिया। डॉक्टरों ने गाय के प्लाज्मा से तैयार कृत्रिम खून चढ़ाकर कार हादसे में बुरी तरह से जख्मी तमारा कोकली (33) की जान बचाई।

‘डेली मेल’ के मुताबिक एक्सीडेंट में तमारा का काफी खून बह गया था। उसके दिल की धड़कन भी थमने लगी थी। डॉक्टरों ने तमारा को मानव रक्त चढ़ाने की कोशिश की, लेकिन मौत के करीब होने के बावजूद वह इसके लिए राजी नहीं हुई। दरअसल, तमारा ‘जेहोवाज विटनेस’ धर्म से ताल्लुक रखती है। उसका धर्म उसे सीधे तौर पर खून चढ़ाने की इजाजत नहीं देता। हालांकि इसमें रक्त के अन्य विकल्पों के इस्तेमाल में कोई मनाही नहीं है।

लिहाजा डॉक्टरों ने उसे हीमोग्लोबिन आधारित प्रयोगात्मक प्लाज्मा ‘एचबीओसी-2-1’ के दस यूनिट चढ़ाए। अमेरिकी फौज द्वारा तैयार यह प्लाज्मा गाय के खून से लिया गया है। तमारा को दो दिन की कड़ी मशक्कत के बाद गाय के प्लाज्मा से बना कृत्रिम खून चढ़ाने में कामयाबी मिली। इसके बाद उसकी हालत में लगातार सुधार आता गया।

इस मामले में मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के प्रो. जुगल किशोर और मैक्स के सजर्न डॉ. प्रदीप चौबे का कहना है कि हालांकि पहले पशुओं के रक्त उत्पाद मनुष्यों में इस्तेमाल होते रहे हैं। जैसे इंसुलिन गाय व सुअर से लिया जाता था। पर ऐसे अवयय लेने से संक्रमण की आशंका ज्यादा रहती है। इसलिए ऐसा करना लगभग बंद कर दिया गया है। संबंधित महिला के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखनी होगी।

(दिल्ली संस्करण)

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