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हॉन्टेड

हॉन्टेड

कहानी : एक प्रॉपर्टी डील के सिलसिले में रेहान (महाअक्षय) को ऊटी जाना पड़ता है, जहां उसे पता चलता है कि वो प्रॉपर्टी तो हांटेड है। वहां भूतों का साया है, जिसका राज पता करने के चक्कर में वो खुद अस्सी साल पीछे अतीत में चला जाता है। यहां उसकी मुलाकात मीरा (टीया बाजपेयी) से होती है, जिसके हाथों उसके पियानो टीचर प्रो. अय्यर (आरिफ जकारिया) का खून होने वाला है। प्रोफेसर मीरा को अपनी हवस का शिकार बनाने वाला होता है, लेकिन रेहान की कोशिशों के बावजूद मीरा उसका खून कर देती है और फिर प्रोफेसर की आत्मा मीरा की दुश्मन बन जाती है। इसी बीच प्रोफेसर मीरा की नौकरानी मार्गेट (अचिंत कौर) और एक नौकर का भी कत्ल कर देता है और रेहान तथा मीरा के खून का प्यासा बन जाता है।

निर्देशन
करीब दो दजर्न से अधिक फिल्में बना चुके विक्रम भट्ट के खाते में राज (2002) एकमात्र ऐसी हॉरर फिल्म है, जिसे लेकर वह आज भी फूले नहीं समाते। हॉन्टेड को उन्होंने 3डी स्टीरियोस्कोपिक इफेक्ट के साथ काफी मंझे हुए ढंग से बनाया है। 3डी तकनीक के लिहाज से हॉन्टेड भारत में बनी अब तक की सबसे उन्नत फिल्म कही जा सकती है, जिसमें सीजीआई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसे जेम्स कैमरून ने अवतार फिल्म में इस्तेमाल किया था। 3डी तकनीक से इतर विक्रम ने एक भुतहा साये वाले बंगले की वीरानी, चीखने-चिल्लाने की आवाजें और चौंका देने वाले दृश्यों की भरमार भी बड़े करीने से पेश की है। लेकिन कहानी के एक बड़े हिस्से को वह अतीत में ले गये हैं, जिसे पचा पाना आसान नहीं है। 

अभिनय
फिल्म के नब्बे प्रतिशत से अधिक हिस्से में अभिनेता महाअक्षय के चेहरे से मायूसी नहीं हटती। क्लाईमैक्स में भी हाथ-पैर मारते वक्त लटके चेहरे के साथ मायूस से नजर आते हैं। अपनी एक्टिंग के बल पर वो फिल्म उठा ले जाएं, इसके आसार कम ही नजर आते हैं। टीया बाजपेयी भी ओके टाइप की ही रहीं। मेकअप के लिहाज से कई सीन्स में आरिफ जकारिया और अचिंत कौर डराने में कामयाब नजर आते हैं।

गीत-संगीत
भट्ट कैप का प्लस प्वाइंट माना जाने वाला संगीत इस फिल्म में नहीं है।

क्या है खास
बैकग्राउंड म्युजिक और सिनेमाटोग्राफी के साथ-साथ 3डी स्टीरियोस्कोपिक तकनीक की वजह से कई सीन्स शॉक देने में कामयाब रहे। खासतौर से बंगले वाले और क्लाईमैक्स के सीन्स।  

क्या है बकवास
रेहान किस वजह से और कैसे अस्सी साल अतीत में चला जाता है, ये समझ से परे है। अंत में मीरा का एक अन्य लैटर उसे मिलना भी गले नहीं उतरता। कहानी में कई अनसुलझे पेंच हैं, जो भटकाव पैदा करते हैं। 

पंचलाइन
3डी फिल्में पहले भी कई बनीं हैं, लेकिन 3डी स्टीरियोस्कोपिक तकनीक के इस्तेमाल से हॉन्टेड आज की ही फिल्म लगती है। इसकी कहानी में तो दम नहीं है, लेकिन तकनीकी लिहाज से यह वन टाइम वॉच मूवी जरूर है।

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  • Web Title:आज की ही फिल्म लगती है हॉन्टेड