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जम्मू-कश्मीर: बेटे के नाम पर फारुक की मुहर

शुक्र है, फारुक अब्दुल्ला मान गए और उन्होंने नेशनल कांफ्रेंस की ओर से उमर अब्दुल्ला को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री-पद का दावेदार घोषित कर दिया। अब कांग्रेस को तय करना है कि सरकार की औपचारिकता किस तरह पूरी होगी। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उमर को मंगलवार को बुलाया है और लगता है, सरकार गठन में बहुत दिक्कत नहीं होगी। उमर ने सोमवार को श्रीनगर से राजधानी आने पर दोपहर में पत्रकारों से कहा कि वे मंगलवार को सोनिया गांधी से मिलने जा रहे हैं और निमंत्रण उधर से मिला है। उन्होंने कहा, हम राज्य में मिली-ाुली सरकार के गठन के बारे में बात करंगे। जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रदेश में तीन-तीन साल तक कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के नेतृत्व में सरकार चलेगी तो उमर ने कहा कि वे किसी फॉमरूले को लेकर सोनिया से नहीं मिलेंगे। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में उमर के साथ उनके पिता डॉ. फारूक अब्दुल्ला नहीं रहेंगे। एक प्रमुख कांग्रेसी नेता के मुताबिक, उमर से भेंट करने से पहले सोनिया प्रदेश कांग्रेस प्रमुख सैफुद्दीन सोज और पूर्व मुख्यमंत्री आजाद से मुलाकात करंगी। फिर भी, सवाल बना है कि डॉ. अब्दुल्ला उमर को नेतृत्व सौंपने के लिए माने कैसे? श्रीनगर के नेकां नेताओं की मानें तो पार्टी नेताओं ने ही उन्हें इसके लिए तैयार किया। लेकिन दिल्ली में कुछ कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उनकी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने रविवार देर रात ही साफ कर दिया कि फारूक की जगह उमर तैयार हों, तब ही समर्थन की बात बढ़ सकती है। जब फारूक तैयार हुए, तब कांग्रेस से समर्थन देने का माहौल बनाने की कोशिश उमर के जीजा सचिन पायलट और पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने शुरू की। वैसे भी, उमर से राहुल गांधी के घनिष्ठ संबंध जगजाहिर हैं इसलिए बहुत दिक्कत होने की संभावना नहीं है।

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  • Web Title: जम्मू-कश्मीर: बेटे के नाम पर फारुक की मुहर