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झूठ की सफेदी का उजला निखरा सच

कहा जाता है कि एक दफा एक वकील ने अदालत में सच बोल दिया। मुकदमा तो हारा ही, कानून व्यवस्था भी उससे नाराज हो गई। इससे यह सच सामने आया कि तंदुरुस्ती चाहते हो तो सच से परहेज सीखो। सच बोलने वाला मूर्ख तो लोगों की आंख की किरकिरी बनेगा ही। मानव जीवन यदि शरीर है तो झूठ प्राण है। आत्मा और झूठ तो अजर-अमर हैं।

सच तो कड़वा होता है। अब कौन मतिहीन है जो जलेबी छोड़ कर कुनैन खाए। झूठ का स्वाद निराला होता है। जितना बोलो उतना मीठा और फलदायक। झूठा यदि कभी पकड़ा भी जाए तो दूसरा झूठ बोल कर छूट जाता है। सच तो गाली और जूते खिलवाता है। किशोरावस्था में मैंने पहले ‘सत्यकाम’ और फिर ‘सत्य हरिश्चंद्र’ फिल्में देखीं। बस मुझ पर सच बोलने का भूत सवार हो गया। फजीहत हो गई। दोस्त नाराज हो गए। मां-बाप, भाई-बहन मुझसे किनारा करने लगे। एक दिन एक काने को काना और एक गधे को गधा कह दिया। काने ने मुझे मारा और गधे ने दुलत्तियां मारीं। यह मेरे सच का नतीजा था।

जो पति-पत्नी आजीवन एक दूसरे से झूठ बोलते हैं, उसे आदर्श गृहस्थी कहा जाता है। बाल कृष्ण का यह कहना कि- ‘मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो’ कितना कोमल, क्यूट, भावुक और मार्मिक झूठ है। इसीलिए बाद में कृष्ण अवतारी पुरुष बने। सच बोलते तो कंस का वध न कर पाते।

सच कितना कुरूप होता है, यह देखने के लिए आप किसी भी फिल्मी हीरोइन के घर सुबह-सुबह जाइए। घंटी बजाइए। दरवाजा खोलते ही आपको जो पूतना, त्रिजटा और ताड़का दिखाई देगी, वही सच है। जिस झूठ का रंग सफेद हो वही शुद्ध, टिकाऊ, प्रामाणिक और विश्वसनीय कहा जाता है। अन्ना हजारे क्या खाकर झूठ बोलेंगे। इसके लिए कलेजा चाहिए।

अपने छुटपन में मैंने और मेरे पड़ोस की एक कन्या ने झाड़ी में छिप कर एक दूसरे को ‘आई लव यू’ कहा। हम दोनों जानते थे कि हम एक-दूसरे से झूठ बोल रहे हैं। उसी का प्रताप है कि आज मैं अपनी पत्नी के साथ सुरक्षित हूं और वो कन्या अपने मियां को तलाक दिए बिना किसी दूसरे के साथ सुखद जीवन जी रही है। झूठ ही सत्य है। सत्य ही झूठ है।

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