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आसमान छूती महंगाई

हमारे आसपास कुछ फल ऐसे हैं, जिन तक अमीर और गरीब सबकी पहुंच रही है। केले भी ऐसे ही फलों की श्रेणी में आते हैं, लेकिन अब ये भी 50 रुपये दर्जन के भाव से बिक रहे हैं। सुनकर सहसा विश्वास नहीं होता, लेकिन यह सच है। आज लगभग सभी मौसमी फलों के दाम 50 रुपये से ही शुरू हो रहे हैं। सरकार को गंभीरता से सोचना चाहिए कि खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छूने लगे हैं, तो उन करोड़ों लोगों के पेट कैसे भरते होंगे, जिनकी कुल आमदनी ही औसतन 20 रुपये रोजाना बैठती है? यूपीए सरकार के पास क्या कोई जवाब है?
विवेक भारद्वाज, सहारनपुर

खांडू की मौत
अरुणाचल के मुख्यमंत्री दोरजी खांडू की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में हुई मौत ने एक बार फिर हवाई सफर की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसी ही घटनाओं में अब तक कई ऊर्जावान ईमानदार नेता हमारे बीच से चले गए। इसलिए केंद्र सरकार को पूरी जांच करानी चाहिए कि कहीं किसी खास कंपनी के हेलीकॉप्टर से तो ये दुर्घटनाएं नहीं हो रही हैं।
रमेश सहगल, स्वाति अपार्टमेंट्स, पटपड़गंज, दिल्ली

लादेन और पाकिस्तान
अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में मारे जाने के बाद पाकिस्तान की समूची व्यवस्था पर से विश्व समुदाय का विश्वास उठ गया है। ऐसे में, अगर 9/11 और 26/11 के हमलों में पाकिस्तानी राजनेताओं और फौजी अधिकारियों का हाथ पाया जाए, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। पाकिस्तान का पूरा सत्ता प्रतिष्ठान खून-खराबे का हिमायती है, अत: अब लादेन के साथ पाकिस्तानी नेताओं और फौजी अधिकारियों के संबंधों की जांच होनी चाहिए। और जो कोई भी मिले, उसे अंतरराष्ट्रीय न्यायालय द्वारा सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए।
मनीषा, जेएनयू

नैतिक बल जुटाइए
भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में सबसे जिम्मेदार कारक है- जनता की खामोशी। हम सभी जानते हैं कि लोकतंत्र में जनता ही सर्वोच्च शक्ति है, क्योंकि उसके मतों से ही सरकार का गठन होता है, परंतु अफसोस की बात है कि कुछ लोग अपने बहुमूल्य मत को चंद रुपयों के बदले में बेच देते हैं। जब सत्ता में पहुंचने की शुरुआत ही भ्रष्टाचार से होगी, तो उससे ईमानदार शासन की उम्मीद भी हम कैसे कर सकते हैं? इसलिए वक्त आ गया है कि मतदाताओं को जागरूक बनाया जाए और उन्हें यह बताया जाए कि चंद रुपयों के बदले आप पांच वर्षो तक अपने प्रतिनिधियों से हिसाब मांगने का नैतिक हक खो देते हैं। भ्रष्टाचार की लड़ाई के लिए नैतिक बल की सबसे अधिक जरूरत है। 
विकास सोनी, औरंगाबाद, बिहार

अमेरिका कब सुधरेगा?
ओसामा को अमेरिका ने मार दिया, अच्छी बात है, लेकिन जरा गौर कीजिए कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक, लीबिया में कितने मासूमों की जानें अमेरिकी फौजों ने अब तक ली हैं। कोई हिसाब है? किसी ने इनकी गिनती की है? ठीक है, हम इस बात से पूरी तरह से सहमत हैं कि अमेरिका या कोई भी देश आगे आकर आतंकवाद से लड़े, तो उसकी सहायता की जानी चाहिए, लेकिन जिसके कदमों से आतंकी पैदा होते हैं, उसकी भी तो निंदा होनी चाहिए। दुर्भाग्य की बात यह है कि तब विश्व समुदाय चुप हो जाता है। पाकिस्तान को उसकी अपनी करनी की सजा मिलनी ही चाहिए, लेकिन किसी देश की संप्रभुता को रौंदने पर जश्न मनाने वाले लोग भूल रहे हैं कि अमेरिका की निगाह में उनकी सरहदों की भी कोई इज्जत नहीं है। इसलिए खुश होते समय, जरा चिंतन भी कीजिए।
मान्या सिंह, गुरु रामदास नगर, दिल्ली-92

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