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काश, लादेन को पकड़ सकते

अमेरिका ने दुनिया भर के मुसलमानों के सामने खुद को नैतिक धरातल पर खड़ा दिखाने के लिए यह कहा जरूर है कि काश वह लादेन को जान से मारने के बजाए उसे जिंदा पकड़ पाता, लेकिन निहत्थे अल कायदा नेता के साथ क्या सुलूक हो यह तय करने के लिए नेवी सील के कमांडो को एक सेकेंड के भी बहुत छोटे से हिस्से का समय ही मिला होगा।

इसे देखते हुए 9/11 के मुख्य सूत्रधार को मारने के उनके फैसले को जायज ठहराया जा सकता है। खतरा यह भी था कि उसकी कमर में बंधी किसी सुसाइड बैल्ट का धमाका उसके साथ ही कमांडो की भी जान ले सकता था। यह एक कठिन समय रहा होगा जिसमें दूसरा मौका नहीं मिलता। अब दुनिया यह कभी नहीं जान सकेगी कि अगर मौका दिया गया होता तो लादेन दोनों हाथ ऊपर करके समर्पण करता या नहीं।

एक रणनीति के तौर पर राष्ट्रपति ओबामा की प्राथमिकता यही है कि आतंकवादियों का सफाया कर दिया जाए। जब से उन्होंने सत्ता संभाली है पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों पर आतंकवादियों के हमले बढ़ गए हैं। ऐसी रणनीति आतंकवादियों में खौफ जगाती है और उन्हें आम लोगों के खिलाफ हिंसा से रोकती है।

लेकिन इन आतंकवादियों के तौर-तरीके अरब देशों के उन नौजवानों से बिल्कुल अलग हैं, जो कुछ दिन पहले सड़कों पर निकले थे और सबको अपने अहिंसात्मक रवैये से हैरत में डाल दिया था। टय़ूनीशिया, मिस्र, सीरिया, लीबिया, बहरीन और यमन में ऐसे कई निहत्थे युवक मारे भी गए। उन्हें पता था कि उनकी मौत का नैतिक पक्ष फौज की ताकत पर भारी पड़ेगा। सबसे बड़ी बात है कि इन लोगों ने अल कायदा के उस मॉडल को नकार दिया था जिसमें हिंसा से ही सब कुछ हासिल किया जा सकता है। 

लादेन को मार गिराना नेवी सील कमांडो की मजबूरी हो सकता है, लेकिन जरा सोचिये कि अगर किसी तरह उसे मारने के बजाए पकड़ा जा सकता और उस पर मुकदमा चलाया जा सकता तो अमेरिका की नैतिक पूंजी कितनी बढ़ जाती, पर अब यह हम कभी नहीं जान पाएंगे।                                           
द क्रिश्चियन साइंस मॉनीटर, अमेरिका

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