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गेहूं निर्यात से पहले गरीबों की जरूरत देखी जाएगी : थामस

खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के राज्यमंत्री के वी थामस ने कहा है कि सरकार गेहूं निर्यात की अनुमति देने के बारे में कोई निर्णय करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहेगी कि प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा कानून के मानदंडों के अनुसार देश में गरीबों के लिए अनाज की पर्याप्त व्यवस्था है।
     
थामस ने कहा, गेहूं निर्यात एक बड़ा नीतिगत मसला है। फिलहाल 6.53 करोड़ परिवार ऐसे हैं, जो गरीबी रेखा (बीपीएल) के नीचे आते हैं। खाद्य सुरक्षा विधेयक के तहत हमें बड़ी संख्या में परिवारों को 35 किलोग्राम अनाज हर माह देना पड़ सकता है।
     
यह पूछे जाने पर कि सरकार गेहूं निर्यात की अनुमति क्यों नहीं दे रही है, थामस ने कहा, अभी विभिन्न राज्यों को बीपीएल परिवारों के लिए 50 लाख टन अनाज आवंटित करना पड़ता है। हम चाहते हैं कि इसके लिए कम से कम इतने अनाज का भंडार हो जो इन कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त हो।
     
उन्होंने कहा कि गेहूं निर्यात की अनुमति से अंतरराष्ट्रीय कीमतें भी प्रभावित होंगी। इसका अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर असर पड़ेगा। हालांकि, किसी समय इस मसले पर फैसला लेना ही होगा। थामस गेहूं खरीद गतिविधियों की समीक्षा के लिए तीन दिन के पंजाब दौरे पर आए हैं।
   
गेहूं के निर्यात पर 2007 से प्रतिबंध लगा है। खाद्यान्नों के भंडारण के लिए अतिरिक्त क्षमता के निर्माण के बारे में पूछे जाने पर थामस ने कहा कि देश भर में 20 लाख टन की वैज्ञानिक भंडारण सुविधा का देश भर में विकास होगा। इसके अलावा निजी उद्यमी गारंटी योजना के तहत 150 लाख टन भंडारण क्षमता का और निर्माण किया जाएगा।
     
उन्होंने कहा कि इस 150 लाख टन में से 50 लाख टन भंडारण क्षमता का निर्माण पंजाब में और 38 लाख टन हरियाणा में किया जाएगा।

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