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कच्चे तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे

अमेरिका और जापान सहित दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के आर्थिक आंकडों के संतोषजनक नहीं रहने से पीली धातु और चांदी में जारी मंदी के बीच कच्चा तेल गुरुवार को लगातार चौथे दिन गिरावट में रहा।
 
कच्चे तेल में कल सबसे अधिक 10 डॉलर से अधिक की गिरावट आई थी। लंदन ब्रेंट 121 डॉलर से उतरते हुए 110.80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया था और आज यह 3.21 डॉलर लुढ़क कर 107.59 डॉलर प्रति औंस पर रहा। इसी तरह से अमेरिकी क्रुड 3.02 डॉलर की गिरावट पर 96.77 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।
 
डीलरों का कहना है कि पिछले चार दिनों से जारी गिरावट कच्चे तेल के कारोबार में अब तक का रिकार्ड है। कल कारोबार के दौरान तो यह 12 डॉलर तक लुढ़क गया था।
 
उन्होंने कहा कि कारोबारी अमेरिकी और यूरोप के आर्थिक आंकडों का विश्लेषण कर रहे हैं। कच्चे तेल में गिरावट के अभी जारी रहने की संभावना है। विकसित देशों के कमजोर आर्थिक आंकडों के साथ ही डॉलर के मजबूत होने से कच्चे तेल और कमोडिटी पर दबाव बना है।
 
उनका कहना है कि लंदन ब्रेंट 50 दिन के न्यूनतम स्तर 105 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। हालांकि उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर विशेष कर पश्चिम एशिया और उत्र अफ्रीका में जारी राजनीतिक अस्थिरता से कच्चे तेल में तेजी आई थी।
 
उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है जिससे कच्चे तेल में फिर से तेजी आने की पूरी संभावना है। लीबिया से तेल आपूर्ति में कमी आने और डॉलर की कमजोरी की वजह से कच्चा तेल वर्ष 2008 के बाद के उच्चतम स्तर पर गया था।
 
विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल और कमोडिटी की कीमतों पर दबाव कई कारणों से बना है। विकसित देशों के साथ ही विकासशील देशों में महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केन्द्रीय बैंकों द्वारा कठोर मौद्रिक नीति अपनाए जाने की वजह भी इसमें शामिल है।

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