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मेरा प्रभाव बुरा माना जाता था: शर्मिला टैगोर

मेरा प्रभाव बुरा माना जाता था: शर्मिला टैगोर

बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने फिल्म जगत में भले ही नई ऊंचाईयों को छुआ हो लेकिन खुद उनका कहना है कि लड़कियों पर उनका प्रभाव अच्छा नहीं माना जाता था और फिल्मी दुनिया में आने के बाद उन्हें स्कूल छोड़ने के लिए कहा गया था।
  
वर्ष 1959 में सत्यजीत रे की 'अपुर संसार' से अपने फिल्मी कॅरियर की शुरुआत करने वाली शर्मिला का कहना है कि उन दिनों उन्हें काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन अब लोगों की मानसिकता में बदलाव आया है।
  
यरूशलम सिनेमेथेक्यू में उनकी फिल्म 'कश्मीर की कली' की स्क्रीनिंग से पहले शर्मिला ने कहा कि आज आए बदलाव को देखकर मैं हैरान हूं। उन दिनों करियर के तौर पर फिल्मों में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था। लेकिन आज बॉलीवुड काफी लोकप्रिय है इसलिए कई लोग इसे करियर के विकल्प के रूप में देख सकते हैं।
  
'अपुर संसार' के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि इससे उन्हें लोकप्रियता हासिल हुई लेकिन दूसरी ओर उनका लड़कियों पर गलत प्रभाव माना जाने लगा। उन्हें कॉलेज में विरोधों का सामना करना पड़ा, जब वह इनसे घिर गईं और उपस्थिति कम होने को लेकर उनसे सवाल किए जाने लगे तो उन्होंने पढ़ाई छोड़ने का फैसला कर लिया।
  
दूसरी ओर उनके पिता गितेन्द्रनाथ टैगोर ने हमेशा उनका साथ दिया। शुरुआत में जब शर्मिला ने कहा कि वह रे की फिल्म में काम करेंगी तब भी वह उनके साथ थे। शर्मिला के पति क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उनका रवैया काफी सहयोगात्मक था।

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