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डेयरडेविल्स से भी रूठ गया है घरेलू मैदान

डेयरडेविल्स से भी रूठ गया है घरेलू मैदान

दिल्ली डेयरडेविल्स भी अब डेक्कन चार्जर्स के नक्शे कदम पर आगे बढ़ गया है। जिस तरह से डेक्कन के लिए आईपीएल की शुरुआत से ही उप्पल का राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम यानी उसका घरेलू मैदान कब्रगाह रहा है उसी तरह से अब फिरोजशाह कोटला स्टेडियम डेयरडेविल्स से रूठ गया है।

डेक्कन ने हैदराबाद में आठ मैच गंवाने के बाद इस सत्र में पहली जीत दर्ज की लेकिन इसके बाद उसे लगातार चार मैच में हार का सामना करना पड़ा। दिल्ली के खिलाड़ियों को भी इस बार कोटला रास नहीं आ रहा है जहां इस सत्र में खेले गए छह मैच में से पांच में उसे हार झेलनी पड़ी है। इसके उलट दिल्ली ने बाहर के मैदानों पर जो पांच मैच खेले हैं उनमें से तीन में जीत दर्ज की है।

डेयरडेविल्स ने कोटला पर अब तक केवल किंग्स इलेवन पंजाब को हरा पाया है जबकि मुंबई इंडियन्स, डेक्कन चार्जर्स, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर, कोलकाता नाइटराइडर्स और कोच्चि टस्कर्स केरल उसे घर में हार का स्वाद चखा गए। इससे अब वीरेंद्र सहवाग की अगुवाई वाली टीम भंवर में फंस गई और उसकी नॉकआउट में पहुंचने की मुश्किलें भी बढ़ गई।

दिल्ली का कोटला में लचर प्रदर्शन के लिए पिच पर भी दोष मढ़ा गया। स्वयं सहवाग ने भी पिच को कोसा था लेकिन बाद में उन्होंने सुर बदल दिए थे और स्वीकार किया था कि टीम के खराब प्रदर्शन के लिए पिच को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। यह अलग बात है कि विकेट में लगातार बदलाव किया गया लेकिन इससे भी डेयरडेविल्स का भाग्य नहीं बदला।

सहवाग ने रॉयल चैलेंजर्स के हाथों हार के बाद कहा था कि गेंद बल्ले पर नहीं आ रही थी और बाउंड्री लगाना आसान नहीं था। काफी घास काट दी गई थी जैसा कि हम नहीं चाहते थे। लेकिन हमें जैसा भी विकेट मिलेगा हमें उस पर खेलना होगा।

लेकिन इसके दो दिन बाद कोलकाता के खिलाफ खेले गए अगले ही मैच में सहवाग के सुर बदल गए थे। उन्होंने कहा था कि क्यूरेटर को कोसने का कोई मतलब नहीं बनता है। हमें खुद के प्रदर्शन पर ध्यान देना होगा।

वैसे दिल्ली के रणजी खिलाड़ी और रॉयल चैलेंजर्स के बल्लेबाज विराट कोहली ने कोटला की पिच की जमकर तारीफ की थी। उन्होंने इस पिच पर 56 रन बनाने के बाद कहा था कि यह बहुत अच्छा विकेट था। मैं इससे पहले कभी यहां इतने अच्छे विकेट पर नहीं खेला। यह बल्लेबाजों ही नहीं गेंदबाजों के अनुकूल भी था।

दिल्ली और डेक्कन के अलावा कोच्चि और पुणे की टीम भी अपने घरेलू मैदान पर सकारात्मक परिणाम हासिल नहीं कर पाए। कोच्चि टस्कर्स केरल को नेहरू स्टेडियम कोच्चि में पांच मैच खेलने थे जिसमें से तीन में उसे हार मिली। उसे बाकी दो घरेलू मैच अब इंदौर के होल्कर क्रिकेट स्टेडियम में खेलने हैं।

पुणे का घरेलू मैदान नवी मुंबई का डी वाई पाटिल स्टेडियम हैं जहां उसे अब तक पांच में से तीन मैच में शिकस्त झेलनी पड़ी है। चेन्नई सुपरकिंग्स के लिए अभी तक घरेलू मैदान बेहद भाग्यशाली रहा है। महेंद्र सिंह धौनी की टीम ने एम ए चिदंबरम स्टेडियम में अब तक खेले गए पांचों मैच जीते हैं।

इसके बाद राजस्थान रॉयल्स का नंबर आता है जिसने जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में खेले गए पांच में से चार मैच जीते हैं। केकेआर ने भी कोलकाता के ईडन गार्डन्स में चार मैच खेले हैं और उनमें से तीन में जीत दर्ज की है। मुंबई इंडियन्स का वानखेड़े स्टेडियम में यही रिकॉर्ड है।

बेंगलूरु ने अब तक चिन्नास्वामी में जो पहले दो मैच खेले उनमें उसका रिकॉर्ड एक जीत और एक हार का रहा। इस मैदान पर एक मैच बारिश के कारण रद्द करना पड़ा था। किंग्स इलेवन पंजाब ने मोहाली में खेले गए दोनों मैच जीते हैं। उसे अपने तीन घरेलू मैच धर्मशाला में भी खेलने हैं। डेक्कन ने इस सत्र में हैदराबाद में पांच मैच खेले हैं जिनमें से चार में उसे हार और एक में जीत मिली।

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