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गुरु जी बताएंगे बच्चों को उनके अधिकार

बच्चे को नाहक पीटा, पढ़ाई से रोका, जबरन मजदूर कराई या फिर घर में कैद करके रखा। तो कानूनी कार्रवाई भुगतनी पड़ सकती है। कुछ इसी तरह की बातों की जानकारी देते हुए केंद्रीय विद्यालय के शिक्षक जल्द ही नजर आएंगे। इसी सिलसिले में पहली बार देशभर में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) से शिक्षक मानव अधिकारों की ट्रेनिंग ले रहे हैं। जल्द ही शिक्षकों के मार्फत छात्रों को उनके अधिकारों से अवगत कराया जाएगा। केंद्रीय विद्यालय संगठन ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के साथ साझा कार्यक्रम शुरू किया गया। पहले चरण में गुरुवार को देशभर के प्रशिक्षण देने वाले प्राचार्यों को प्रशिक्षित किया गया। तीन दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में देशभर से चुने हुए प्राचार्यों ने हिस्सा लिया। जिसमें केंद्रीय विद्यालय संगठन के विभिन्न संभाग के सहायक आयुक्त, शिक्षा अधिकारी, केंद्रीय विद्यालय संगठन मुख्यालय, नई दिल्ली के उपायुक्त को मानव अधिकार संबंधित जानकारी दी गई।

मानव अधिकार को शिक्षा के साथ जोड़ने को लेकर केंद्रीय विद्यालय संगठन के आयुक्त अविनाश दीक्षित ने कहा कि केवीएस के शिक्षकों को इस प्रकार के ट्रेनिंग की जरुरत है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार शिक्षा का विस्तार हो रहा है। इसको देखते हुए बच्चों को उनके अधिकारों की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मानव अधिकार को पाठ्यक्रम का अंग बनाया जाना चाहिए।

तीन दिन तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में प्रशिक्षकों को शिक्षा का अधिकार, बाल अधिकार, पर्यावरण एवं मानव अधिकार, मानव अधिकार एवं अपंगता, महिला अधिकार के लिए संवैधानिक प्रावधान आदि विषयों की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण को सात सत्रों में बाटा गया। पहले सत्र में एनसीपीसीआर की राष्ट्रीय संयोजक किरन भाटी ने शिक्षा के अधिकार से संबंधित दी। जबकि दूसरे सत्र में एनएचआरसी के उपनिदेशक डां. संजय दुबे ने मानव अधिकार के उद्देश्य और परिकल्पना की जानकारी दी।

तैयारी

मानव अधिकार को शिक्षा का अंग बनाने पर जोर
केंद्रीय विद्यालय के शिक्षकों को मानव अधिकार की ट्रेनिंग

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