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योजनाओं की स्वीकृति अब डीएम के जिम्मे नहीं

जिलाधिकारी अब योजनाओं की स्वीकृति नहीं देंगे। यह व्यवस्था पूरी तरह खत्म होगी। योजनाओं की स्वीकृति अब सम्बद्ध अधिकारियों के जिम्मे होगा। डीएम अब सिर्फ योजनाओं की मॉनीटरिंग करेंगे। यही नहीं योजनाओं की प्रबंधकीय निगरानी भी उनके जिम्मे होगी।

उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बताया कि डीएम पर अनावश्यक रूप से कार्य का बोझ बढ़ता जा रहा था। उनका अधिकांश समय योजनाओं की स्वीकृति देने में ही लग जाता था। इससे विकास योजनाओं में अत्यधिक विलंब होने लगा था। इस वित्तीय वर्ष में सभी योजनाओं में यही व्यवस्था काम करेगी।

कई योजनाओं में यह व्यवस्था लागू कर दी गई है और शेष अन्य योजनाओं में धीरे-धीरे इसे लागू कर दिया जाएगा। राज्य सरकार ने केन्द्र से सांसद निधि अनुशंसित योजनाओं से भी डीएम को मुक्त करने का अनुरोध किया है। केन्द्र सरकार यह राशि सीधे डीएम को भेजती है।

राज्य सरकार ने केन्द्र से इन योजनाओं का कार्यान्वयन केन्द्रीय एजेंसियों के माध्यम से कराने का सुझाव दिया है। अगर राज्य सरकार से ही यह कार्य कराना है तो केन्द्र राज्य सरकार को छह फीसदी राशि दे। मोदी का कहना है कि चूंकि नई व्यवस्था में राज्य में इस तरह का कार्यान्वयन तंत्र खत्म हो चुका है, लिहाजा उसे विकसित करने के लिए धनराशि खर्च करनी होगी। केन्द्र इसमें मदद करे।

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