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'कॉमन स्कूल की भावना के विपरीत काम कर रहा केन्द्र'

शिक्षा मंत्री प्रशांत कुमार शाही ने कहा कि केन्द्र सरकर कामन स्कूल सिस्टम की भावनाओं के प्रतिकूल काम कर रही है। गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में शाही ने कहा कि जिन योजनाओं में आर्थिक सहायता केन्द्र करता है, उसके बंधेज को मानना है राज्य सरकार की मजबूरी है। ऐसे में कोई भी निर्णय लेने का स्कोप राज्य के पास है ही नहीं।

अनिवार्य शिक्षा कानून (आरटीई) के प्रावधानों पर शाही ने कहा कि केन्द्र तो चीजें तय करता है पर उसकी दिक्कतों को लेकर कोई प्रावधना ही नहीं है। अब 25 फीसदी गरीब बच्चों के नामांकन का मसला भी ऐसा ही है। इसे लेकर मैं खुद आश्वस्त नहीं हूं कि वर्ष 2011 में यह किस हद तक लागू हो सका है। हालांकि यह पहला वर्ष है और पहले वर्ष की व्यावहारिक दिक्कतें भी किसी योजना में अधिक रहती हैं।

केन्द्र की योजनाएं पूरे देश में लागू होती हैं। माइक्रो मैनेजमेंट भी वही करता है। पर हर राज्य की अपनी दिक्कतें और अपनी जरूरतें होती हैं। राज्यों को इतनी स्वतंत्रता जरूर होनी चाहिए कि हम उसे अपने तरीके से मोल्ड कर सकें। तभी कोई भी योजना सफल होगी।

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