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बेसहारा-बेघर महिलाओं का अब अपना आशियाना

कमजोर, बेसहारा और बेघर महिलाओं का अब अपना आशियाना होगा। यह पूरी तरह उनकी अपनी दुनिया होगी जहां सबकुछ उनके लिए होगा। इस ‘आसरा’ में कष्ट-पीड़ा और त्रसदी का दूर-दूर तक नाम नहीं होगा। यह उनका ऐसा घर होगा जहां उनके लिए न सिर्फ छत होगी बल्कि हुकूमत भी उनकी होगी। यहां न कोई उन्हें सताएगा और न कोई परेशान करेगा। उनके मन से संगीत की स्वर लहरियां गूंजेंगी। यही नहीं उन्हें इस घर में खास प्रशिक्षण भी मिलेगा। साथ ही पढ़ने-लिखने की भी व्यवस्था की जाएगी।

समाज कल्याण विभाग ने लावारिस, मानसिक रूप से कमजोर, बेघर महिलाओं के लिए ‘आसरा’ कार्यक्रम शुरु करने की योजना बनाई है। मौजूदा घर की परिकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से तैयार इस योजना में ऐसी जरूरतमंद महिलाओं को उनकी बुनियादी जरूरतों के अनुरूप हर चीजें दी जाएंगी। इस घर में रहने, खाने-पीने के साथ-साथ प्रशिक्षण की व्यवस्था भी होगी। उनके अध्ययन के लिए पृथक व्यवस्था की जाएगी।

इसमें उन्हें सामान्य अध्ययन के साथ-साथ नई जानकारियां भी मिलेंगी। उनके मनोरंजन की भी व्यवस्था होगी ताकि वे खाली समय में बोरियत महसूस न करें। सरकार की सोच यह है कि ऐसी महिलाएं जिन्हें सहारे की सबसे अधिक जरूरत है उन्हें नया आसरा दिया जाए। पहले चरण में विभाग ऐसे दो घर की योजना पर काम कर रहा है। भविष्य में इसकी संख्या बढ़ेगी।

एक घर में कम से कम 50 महिलाओं के रहने की बेहतर व्यवस्था होगी। परियोजना के अन्य पहलुओं पर विमर्श चल रहा है। इसका संचालन गैर सरकारी संगठन के माध्यम से करने की योजना है। ‘इस समय हमारे सामने ऐसी महिलाओं को लेकर विशेष चुनौतियां हैं। हम इन्हें बेहतर परिवेश देना चाहते हैं, जिसमें इनके लिए रहने,खाने से लेकर पढ़ने और प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी। हमारा उद्देश्य है कि ऐसी महिलाएं जो कमजोर व बेघर हैं, उनकी कमजोरी ही उनकी ताकत बने।’ - परवीन अमानुल्लाह, समाज कल्याण मंत्री

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