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नक्सल प्रभावित जिलों में विकास की बौछार

नक्सल प्रभावित जिलों में विकास की बौछार की जा रही है। केंद्र सरकार इसके लिए पूरा धन उपलब्ध करा रहा है। केंद्र का मानना है कि विकास की गंगा बहाकर ही नक्सल समस्या से निजात पाया जा सकता है।

इंट्रीगेटेड एक्शन प्लान (आइएपी), सिक्यूरिटी रिलेटेड एक्सपेंडीचर (एसआरई), स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम (एसआईएस) ऐसी योजनाएं हैं, जो सिर्फ नक्सलग्रस्त जिलों में चल रही हैं। देश के 36 चुनिंदे जिलों को पॉयलट प्रोजेक्ट में रखा गया है। वहां अलग से धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। एसआइएस योजना झारखंड के 14 जिलों में चल रही है।

इन योजनाओं पर हो रहा है काम : आंगनबाड़ी भवन निर्माण, स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण, पुल-पुलिया और सड़क निर्माण, चेकडैम निर्माण, डीप बोरिंग स्कीम, स्कूलों में बेंच और डेस्क की आपूर्ति, सोलर लाइट और माइक्रो लिफ्ट एरिगेशन का काम चल रहा है।

एसआरई : सिक्यूरिटी रिलेटेड एक्सपेंडीचर की पूरी राशि पुलिस महकमा खर्च करती है। रकम भारत सरकार से उपलब्ध कराई जाती है। इसमें 70 फीसदी केंद्र का और 30 फीसदी राज्य सरकार का हिस्सा होता है। संथालपरगना को छोड़ राज्य के सभी जिलों को एसआरइ का लाभ दिया जा रहा है।

इसके तहत ग्रामीणों के बीच फुटबॉल वितरण, विद्युतीकरण, पाठ्यपुस्तक वितरण, कंबल, धोती और कपड़ा का वितरण, नक्सलियों के विरुद्ध प्रचार-प्रसार के लिए पोस्टर जारी करने का खर्च के साथ केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात सीआरपीएफ के जवानों की प्रतिनियुक्ति भत्ता का भी वहन किया जाता है।

एसआइएस : इस योजना के तहत कई बड़ी योजनाएं स्वीकृत की जाती हैं। रांची सहित 18 उग्रवादग्रस्त जिलों में इसके तहत कई योजनाएं ली गई हैं, जिसपर काम जारी है। स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम (एसआईएस) के तहत बड़े भवनों का निर्माण भी स्वीकृत किया गया है। नौकरी के लायक बेरोजगार युवकों को पुलिस तैयार भी करती है।

अन्य योजनाएं : इसके अलावा उग्रवादग्रस्त जिलों में बाकी अन्य योजनाओं का भी लाभ मिल रहा है। सड़क निर्माण की दिशा में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, आरइओ, पेयजल, स्वास्थ्य, चिकित्सा और शिक्षा की सभी योजनाएं नक्सलग्रस्त जिलों में चल रही हैं। कई स्थानों पर नक्सलियों ने विकास योजनाओं को रोक दिया है। अगर सड़क निर्माण की उन योजनाओं को पूरा करा लिया जाए तो स्थिति बदल सकती है।

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