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अतिक्रमण हटाए बिना एचइसी को नहीं मिलेगी एक भी पाई

एचइसी को अपनी जमीन से अतिक्रमण हटाना ही होगा। अतिक्रमण हटाए बगैर उसे राज्य सरकार से बकाया नहीं मिलेगा। एचइसी की 315 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण है। सरकार ने जमीन खाली कराने के बाद इसका हस्तांतरण करने एवं करीब 75 करोड़ रुपए भुगतान करने की बात कही थी। एचइसी के रिवाइवल पैकेज में भी इसका उल्लेख है और हाइकोर्ट ने भी इसे मंजूरी प्रदान की है।

इधर एचइसी ने राज्य सरकार से 33 एकड़ जमीन को वापस लेने का आग्रह किया था। इस जमीन पर आंशिक अतिक्रमण है। एचइसी ने सरकार से इसके बदले 26 करोड़ का भुगतान करने का आग्रह भी किया था। एचइसी ने कहा था कि इस जमीन की कीमत 34 करोड़ है। लेकिन कुछ हिस्से पर अतिक्रमण है।

जिन हिस्सों में अतिक्रमण नहीं है उसे लेकर बदले में 26 करोड़ का भुगतान किया जाए। शेष आठ करोड़ अतिक्रमण हटने के एचइसी मांगेगा।  पिछले दिनों मुख्य सचिव के साथ बैठक में सीएमडी जीके पिल्लई ने यह मामला उठाया था। लेकिन इसके बाद सरकार ने इस पर असहमति जताते हुए एचइसी के प्रस्ताव को विधि विभाग के पास भेज दिया।

इससे पहले भी राज्य सरकार से एचइसी ने 75 करोड़ रुपये की मांग की थी, जिसे साफ तौर पर राज्य सरकार ने नकार दिया था। एचइसी पर राज्य सरकार का बिजली तथा अन्य टैक्सों के मद में लगभग 750 करोड़ रुपये का बकाया है। इसके एवज में एचइसी को राज्य सरकार के पक्ष में 2393 एकड़ जमीन उपलब्ध करानी थी।

इसमें से एचइसी ने अतिक्रमण रहित 1924 एकड़ जमीन राज्य सरकार को उपलब्ध करा दी है। शेष 315 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण है। इसमें से 33 एकड़ जमीन पर हलका फुलका अतिक्रमण है। इसी के एवज में एचइसी 26 करोड़ रुपये की राशि मांग रहा है।

विधि विभाग से मांगी गयी है राय: उद्योग सचिव
उद्योग सचिव एपी सिंह से इस संबंध में पूछे जाने पर कहा कि मामला विधि विभाग के पास भेजा गया है। उससे मंतब्य मांगा गया है। मगर एचइसी के पक्ष में मंतब्य आने की उम्मीद नहीं है।

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