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अभी पढ़ाते रहिए, अगले साल मिलेगा वेतन

केन्द्र सरकार की आधुनिक मदरसा योजना खुद सरकार की उपेक्षा से ही दम तोड़ रही है। खास वर्ग को लुभाने के लिए योजना तो शुरू की गयी, मगर मानदेय पर नियुक्त शिक्षक अब वेतन के अभाव में फांकाकशी की नौबत पर पहुंच चुके हैं। और सरकार अभी अगले वित्तीय वर्ष में मानदेय भुगतान का दावा कर रही है।
प्रदेश के कितने मदरसों के वेतन बकाये हैं, यह मानव संसाधन विकास मंत्रलय के एक पत्र में उल्लिखित है। जिसके मुताबिक प्रदेश के 2,397 मदरसों के 6,179 शिक्षकों को 14 माह और 3,048 मदरसों के 6,179 को 2 वर्ष के मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक जनपद के 29 मदरसों का 28 माह के वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। इनमे 84 शिक्षक शामिल हैं। वहीं 39 मदरसों के 132 शिक्षकों को अभी भी 14 माह के मानदेय का इंतजार है।
मानदेय के बावत टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया उप्र के महामंत्री वहीदुल्लाह खां सईदी ने प्रधानमंत्री को जनवरी 2011 में एक पत्र लिखा था। जिसपर प्रधानमंत्री ने मानव विकास मंत्रलय से जवाब मांगा था। मंत्रलय की ओर से 5 अप्रैल को जारी जवाब में उक्त आंकड़ा देते हुए अगले वित्तीय वर्ष में भुगतान की बात कही है। बता दें कि मंत्रलय ने वेतन मद में वर्ष 2009 से 4 फरवरी 2010 के कुछ मदरसों के बकाये मानदेय की धनराशि जारी कर दी है।
वहीं, कांग्रेस सचिव व प्रदेश प्रभारी परवेज हाशमी का दावा है कि वित्तीय वर्ष 2011 तक का मानदेय जारी कर दिया गया है। लेकिन मानव संसाधन विकास मंत्रलय के पत्र ने हाशमी की वेबसाइट पर जारी बयान की असलियत जाहिर कर दी है। बजरडीहा स्थित मदरसा हमदिया रिजविया के महफूज खां, लोहता के मदरसा तालीमुलक्ष्स्लाम के इफ्तेखार और मदरसा फैजूलउलूम के नेसार के मुताबिक शिक्षकों की बदहाली का कारण सरकार की उदासीनता है।

जंतर-मंतर पर दे चुके हैं धरना
बकाया मानदेय की मांग को लेकर मदरसा शिक्षकों ने 23 से 25 फरवरी तक दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर धरना दिया था। प्रदर्शन के दूसरे दिन ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के हस्तक्षेप पर राजनैतिक सलाहकार अहमद पटेल ने कपिल सिब्बल से वार्ताकर शिक्षकों का धरना समाप्त कराया था। शिक्षकों को आश्वस्त किया गया कि अप्रैल 2011 तक मानदेय का भुगतान कर दिया जाएगा।

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