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बीआरटी कॉरिडोर से बढ़ेगी साइबर सिटी की रफ्तार

दिल्ली की तर्ज पर अब साइबर सिटी में भी बस रैपिड ट्रांजिट (बीआरटी) सिस्टम को अमलीजामा पहनाने की कवायद शुरू हो गई है। शहर में बसों के लिए बीआरटी कॉरिडोर बन जाने से जहां पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन को काफी हद तक बढ़ावा मिलेगा वहीं आम लोगों को जाम के झाम से छुटकारा।
गुड़गांव-मानेसर अर्बन कॉम्पलेक्स के लिए तैयार किए गए इंटीग्रेटेड मोबैलिटी प्लान (आईएमपी) में पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन पर लोगों की निर्भरता को बढ़ाने के लिए शहर के प्रमुख मार्गो पर बीआरटी कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था दुरुस्त नहीं होने की वजह से फिलहाल लोगों को प्राइवेट वाहनों पर निर्भर होना पड़ता है। जिसकी वजह से शहर में ट्रैफिक का घनत्व दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। ट्रैफिक की वजह से पीक आवर्स में शहर के तकरीबन सभी प्रमुख मार्गो पर जाम के हालात पैदा हो जाते हैं।
भविष्य में ट्रैफिक की समस्या से निपटने के लिए आईएमपी में पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन को बढ़ावा देने के लिए कई तरह के सुझाव दिए गए हैं। इसी के तहत साइबर सिटी में बीआरटी कॉरिडोर बनाने के लिए आधा दजर्न रूट्स को चिह्न्ति किया गया है। जिनपर कुल 74 किलोमीटर का बीआरटी कॉरिडोर बनाने की योजना है।
74 किलोमीटर की लंबाई के बीआरटी कॉरिडोर को बनाने में 888 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। एक किलोमीटर पर करीब 12 करोड़ का खर्चा आएगा। इस प्रोजेक्ट के  लिए पांच वर्ष का समय निर्धारित किया गया है।
इनर रिंग रोड, ओल्ड एनएच-8, पालम विहार रोड, सोहना रोड पर लो और मीडियम कैपेसिटी के कॉरिडोर बनाए जाएंगे, जबकि खांडसा रोड पर हाई कैपेसिटी का बीआरटी कॉरिडोर विकसित किया जाएगा।

बीआरटी कॉरिडोर के लिए चिह्न्ति रूट्स
-25 किमी. लंबा बीआरटी कॉरिडोर इनर रिंग रोड पर बनेगा
-09 किमी. लंबा बीआरटी कॉरिडोर ओल्ड एनएच-8 पर भी बनेगा
-10 किमी लंबा सोहना रोड, 05 किमी लंबा खांडसा रोड पर कॉरिडोर
-06 किमी. पालम विहार रोड, 19 किमी मानेसर रोड पर होगी लंबाई

पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मिलेगा बढ़ावा
बीआरटी कॉरिडोर से जहां बसों के लिए अलग से कॉरिडोर निर्धारित होगा वहीं पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर लोगों की निर्भरता भी बढ़ेगी। जिससे प्राइवेट वाहनों की संख्या में कमी आएगी। कॉरिडोर से पीक आवर्स में लगने वाला जाम भी कम होगा। क्योंकि शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए सड़कों पर 300 नई बसें उतारने की योजना है। बसों को जाम से बचाने के लिए बीआरटी कॉरिडोर काफी कारगर साबित हो सकते हैं। बीआरटी के बन जाने से यात्राियों को जाम में नहीं फंसना पड़ेगा।

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