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वह लातों का भूत तुम्हारी क्यों माने

क्यूं पाकिस्तान का भेजा खा रहे हो भाई। वो क्यूं लाकर दे हाफिज सईद या दाऊद। जब कोई इनकी मांग उससे करता है, तो मुझे वह उस अनपढ़-सा नजर आता है, जो समंदर के बाहर खड़ा होकर कह रहा हो, लाओ मुझे मोती दे दो। क्यूं दे दूं? अरे समंदर ने रामजी को रास्ता नहीं दिया, तो किसी को खुद ब खुद मोती क्या देगा। पाकिस्तान एक समंदर है, जिसकी तलछट में एक से एक मोती बैठे हैं, जिसे चाहिए खोज लाइए।

रामजी कई दिन (दिनों की सही संख्या जानने के लिए रामायण देख लें, यहां बात कुछ और चल रही है) समंदर के किनारे बैठकर तप करते रहे कि भई रास्ता छोड़ दो सेना उधर ले जानी है, वह नहीं माना। जब तीर ताना, तो आधा माना। बोला, पुल बना लो, बहने नहीं दूंगा। विष्णु के अवतार की जिसने नहीं सुनी, वह विष्णु को पूजने वाले की भला क्यूं सुनेगा।

पाकिस्तान बड़ा गहरा और प्रकृति के नियमों से चलने वाला देश है। कुछ चाहिए, तो तानना पड़ेगा। 10 बरस से अमेरिका हाथ जोड़े फल-फूल चढ़ा रहा था, भइए लादेन दे दो, लादेन दे दो, दिया क्या? कुछ नहीं, बस लेता रहा फल-फूल, मोदक और करवाता रहा चिरौरी। जब मिसाइल तानी, तो रामायण काल के उस समंदर की तरह बोल दिया, भइए अड्डा बना लो, ढूंढ़ लो, जमीन दे दूंगा। आखिर में ओसामा जैसे मोती को ढूंढ़कर निकालने के लिए कूदना तो अमेरिका को ही पड़ा।

अब अपनी बात कर लो, अमेरिका के सामने कहां टिकते हो भाई। उसके पास फल-फूल और मोदक भी आपसे ज्यादा हैं और तानने के लिए तीर भी। दुनिया का दादा है, पर दस बरस लग गए मोती तक पहुंचने में। तुम फूल की बजाय गाली देते हो और हूल देने की बजाय खाली हल्ला मचाते हो। तुम्हें तो अपनी जमीन पर झंकने भी नहीं देगा। इधर-उधर गा-बजा कर मांगते रहो दाऊद-दाऊद और पुकारते रहो सईद-सईद। जब गोता लगाने का दम आ जाए, तो फिर कूद जाना आंख मूंद के किसी न किसी सीप में सईद और किसी न किसी घोंघे में दाऊद घुसा मिल ही जाएगा। पकड़ कर रगड़ दो। मिमियाने से सिर्फ मायकेवाले मानते हैं, पाकिस्तान नहीं।

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