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गुरुदेव टैगोर की याद में

गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर का 150वां जन्म शताब्दी वर्ष सात मई को पूरे देश में  मनाया जाएगा। भारतीय कला और संस्कृति के क्षेत्र में गुरुदेव का योगदान विपुल है। वह एक साथ उपन्यासकार, अभिनेता, शिक्षाविद्, विचारक, चित्रकार एवं संगीत संयोजक थे। सृजन के प्रति ललक के कारण ही सत्तर बसंत पार करने के बाद उन्होंने चित्रकारी सीखी। गुरुदेव ने 1,000 से अधिक कविताओं और 2,000 से अधिक गीतों की रचना की। उन्होंने अनेक लघुकथाएं, नाटक, उपन्यास तथा कई निबंध भिन्न-भिन्न विषयों पर लिखे। वर्ष 1912 में उन्होंने ‘जन-गण-मन’ गीत लिखा था। इसमें उन्होंने भारत की विविधता में एकता का निरूपण किया। उन्होंने हजारों चित्र बनाए। वर्ष 1913 में उनकी प्रसिद्ध कृति ‘गीतांजलि’ को ‘नोबेल पुरस्कार’ मिला। सचमुच कितने महान थे गुरुदेव। इसलिए उनकी याद में सात मई को देश भर में भव्य आयोजन होना चाहिए।
अरविंदो कुमार ‘चंदेल’, बेगूसराय, बिहार

अमेरिका ने रचा इतिहास
ओसामा बिन लादेन को मारकर अमेरिकी ऑफिसरों ने वाकई इतिहास रच दिया है। किंतु सिर्फ ओसामा को मारने से आतंकवाद खत्म नहीं हो जाएगा, क्योंकि उसकी जारज संतानें कौरवों से कम नहीं हैं। वे भी अपने आका की मौत का बदला लेने की ताक में होंगे। वे कभी भी, कहीं भी आतंक का तांडव कर सकते हैं, क्योंकि आतंकवादियों को कभी समझाया नहीं जा सकता। इसलिए यह वक्त सावधान रहने और अपने आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने का है। क्या पता, पड़ोस में ही आतंकी छिपे हों।
प्रभांशु कुमार

आतंकियों का हश्र
अमेरिकी सत्ता प्रतिष्ठान ने ओसामा बिन लादेन को मारकर 9/11 का बदला ले लिया है। लादेन का खात्मा होने के साथ ही आतंक के एक बड़े साम्राज्य का भी अंत हो गया है। अब 26/11 के गुनहगारों के खात्मे का इंतजार है। ओसामा की मौत के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान आतंक का गढ़ है। आतंकवादी पाकिस्तान सरकार की छत्रछाया में वहां फल-फूल रहे हैं। अब भारत सरकार को अमेरिकी सरकार के सहयोग से 26/11 के गुनहगारों को मारने के लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाना चाहिए, ताकि हम भी अपने बेगुनाहों की मौत का बदला ले सकें।
जीवन कुमार

हमें भी चाहिए ऐसा दबंग
विश्व के सबसे खौफनाक दहशतगर्द की मौत के साथ आतंक के एक युग का आखिरकार खात्मा हो ही गया..वह भी आतंक को हमेशा संरक्षण देने वाले पाकिस्तान में। सबसे अहम बात जो इस मिशन की रही, वह थी अमेरिका की उम्दा प्लानिंग। खुद पाकिस्तान को भी कुछ पता नहीं चला। हालांकि इस पर भी विशेषज्ञों की राय में समानता नहीं है। खैर, इस पूरी कार्रवाई से एक तस्वीर साफ होती है कि अमेरिका यूं ही दुनिया का दबंग बनने का एकाधिकार नहीं रखता, जिस तरह पाकिस्तान में घुसकर उसके सैनिकों ने इस पूरे मिशन को अंजाम दिया, उससे उसके सिरमौर होने की बात खुद ब खुद साबित हो जाती है। अमेरिका चाहता, तो शायद ओसामा को जिंदा भी पकड़ सकता था, लेकिन उसने ऐसा किया नहीं, क्योंकि 9/11 के हमले ने विश्व की इस सबसे बड़ी शक्ति को हर तरह से गहरे जख्म दिए थे। पाकिस्तान जैसा देश, जो अमेरिका के रहमोकरम ही पर चल रहा है, इस कार्रवाई पर सिवाय चुप्पी साधने के और कुछ नहीं कर सकता। काश! पाकिस्तान पहले ही समझ लेता कि बुरे काम का अंजाम बुरा ही होता है, तो उसकी यह दुर्गति नहीं होती। पीड़ा तो इस बात की है कि इतनी फजीहत के बाद भी उसके हुक्मरां बेशर्मी दिखा रहे हैं।
कुलदीप सिसोदिया

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