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पाकिस्तान को चेतावनी

सोमवार को अमेरिका ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में किन-किन लोगों का समर्थन मिल रहा था, वह इसकी तह तक पहुंचेगा। एक दुस्साहसिक छापे में अल कायदा प्रमुख को मारने के बाद अमेरिका ने दहशतगर्दी के खिलाफ जंग में साथी पाकिस्तान से बेहद सख्त सवाल पूछे हैं। आतंकवाद के मामलों में राष्ट्रपति बराक ओबामा के मुख्य सलाहकार जॉन ब्रेन्नन ने कहा कि यह दावा ‘ऐतबार’ करने लायक नहीं है कि पाकिस्तान में लादेन का कोई सपोर्ट नेटवर्क नहीं था।

जिस तरह से एबटाबाद की किलानुमा इमारत में बिन लादेन रह रहा था, और पाकिस्तानी अधिकारियों को कोई शक नहीं हुआ, इस बात से अमेरिकी हक्के-बक्के हैं। इस्लामाबाद के करीब अल कायदा के मुखिया की मौत का पाकिस्तान और अमेरिका के संबंधों पर गहरा असर पड़ेगा। अल कायदा और उसके जेहाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का केंद्र पाकिस्तान ही है। यह पश्चिम का सबसे खास सहयोगी रहा है, अलबत्ता जहां तक सीआईए की बात है, तो यह एक मुश्किल साथी भी साबित हुआ है।

पाकिस्तानी लगातार इस बात से इनकार करते रहे हैं कि उनका अल कायदा से कभी कोई संबंध रहा या फिर अफगानिस्तान में उसे पनाह देने वाले तालिबान के साथ ही कोई रिश्ता है। वर्ष 2002 से ही पाकिस्तान तालिबान के नेताओं की पनाहगाह रहा है। अब इस खुलासे के बाद कि ओसामा बिन लादेन फौजी इलाके में बनी एक बड़ी इमारत में रह रहा था और वह भी पाकिस्तान की मिलिट्री एकेडमी से इतना करीब, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि पाकिस्तानी फौज के खुफिया विभाग (आईएसआई) ने ओसामा के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए क्या किया और उसे कब इसके बारे में सूचना मिली?

इमारत की बाहरी दीवारें काफी ऊंची हैं और वे कंटीली तारों से घिरी हैं। इतना ही नहीं, उनमें सुरक्षा संबंधी कैमरे भी लगे हैं। इसे किसने बनाया? क्या कभी भी स्थानीय पुलिस-प्रशासन और मिलिट्री एकेडमी को इसके बारे में जानने की जरूरत नहीं महसूस हुई?
ईरान न्यूज

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