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हिल ड्राइविंग: एडवेंचर से घबराना कैसा

हिल ड्राइविंग: एडवेंचर से घबराना कैसा

अगर इन छुट्टियों में यात्रा की मौज-मस्ती में मूड एडवेंचर का लुत्फ लेने का है तो हिल ड्राइविंग की तैयारी करें। मामूली सी जानकारी और सावधानी के साथ आप यादगार डेस्टिनेशंस पर खुद ड्राइविंग करते हुए जाएं।

हॉलिडे सीजन शुरू हो चुका है। आप भी कहीं ना कहीं घूमने का कार्यक्रम बना रहे होंगे। यदि आपको लांग ड्राइव का शौक है तो आप जरूर यह सोच रहे होंगे कि इस बार सेल्फ ड्राइव टूर के लिए कहां जाया जाए। गर्मियों का मौसम है तो जाहिर है किसी हिल स्टेशन का रुख क्यों न करें। अरे! यह क्या आप तो सोच में पड़ गए। अच्छा, आप जरूर यह सोच रहे होंगे कि पहाड़ों पर सैल्फ ड्राइविंग एक बेहद कठिन काम है। लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। पहाड़ों में यदि सावधानी से ड्राइविंग की शुरुआत की जाए तो आप देखेंगे कि इसका एक अलग ही आनंद है। लांग ड्राइव की तरह हिल ड्राइविंग भी अपने आप में एक ऐसा एडवेंचर है जो प्रकृति से आपका साक्षात्कार कराता है। अपनी गाड़ी से पहाड़ी सफर न करने का एक कारण तो यह है कि लोग घुमावदार रास्तों का भय मन में बैठाए हिल ड्राइविंग की शुरूआत ही नहीं करते।

बस, बात इतनी सी है कि हिल ड्राइविंग में सामान्य ड्राइविंग से कुछ अतिरिक्त सतर्कता और गति नियंत्रण की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही सुरक्षा और सुविधा की दृष्टि से पहाड़ों पर वाहन चलाने के कुछ नियम भी हैं। इन सबका ध्यान रखें तो यह कार्य कठिन नहीं। शुरुआत ऐसे पर्यटन स्थलों से की जा सकती है जो कम ऊंचाई पर हों तथा वहां के मार्ग में चौड़ी एवं सुविधायुक्त सड़कें हों। दिल्ली के निकट स्थित सैरगाहों में मसूरी, नैनीताल, लैंसडोन, कसौली आदि कुछ ऐसे ही स्थान हैं जहां पहली बार हिल ड्राइविंग का आनंद लिया जा सकता है। दो तीन बार ऐसे डेस्टिनेशन पर जाने के बाद आपको लगेगा कि वास्तव में हिल ड्राइविंग अपने में एक खूबसूरत अनुभव है। एक बार अभ्यस्त होने के बाद तो आपको अन्य हिल स्टेशन भी सैल्फ ड्राइव टूर के लिए आमंत्रित करेंगे। उसके बाद आप डलहौजी, धर्मशाला, नई टिहरी, अल्मोड़ा, रानीखेत जैसे पर्वतीय स्थलों का रुख कर सकते हैं।

प्राकृतिक सौन्दर्य से भरे घुमावदार मार्ग पर घने पेड़ों की छाया, ऊपर से गिरते झरने, गहरी घाटियां, साथ बहती नदियां आपके सफर का हिस्सा होंगे। इस तरह आपके सफर का मजा दोगुना हो जाता है। पहली बार जा रहे हैं तो ऐसा डेस्टिनेशन चुनें जहां पहाड़ी मार्ग अधिक लम्बा न हो। अब देखिए ना, दिल्ली से नैनीताल जाना हो तो आपके सफर की कुल दूरी 310 किमी. होगी। उसमें से काठगोदाम तक आपको मैदानी सड़क मार्ग पर जाना है। उसके बाद केवल 36 किमी. का पहाड़ी मार्ग तय करना शेष रहता हैं। अच्छी बात यह है कि काठगोदाम से नैनीताल तक चौड़ी और अच्छी सड़क बनी है। इसलिए सावधानी से गति पर नियंत्रण रखते हुए गाड़ी चलाएं तो किसी तरह की परेशानी नहीं होती। और फिर नैनीताल ही क्या उधर मसूरी जाना हो तो आपको देहरादून से मसूरी का मार्ग भी सुरक्षित मार्ग माना जाता है। उस रूट पर मात्र 34 किमी. का घुमावदार रास्ता तय करना है। हालांकि दिल्ली से मसूरी 269 किमी.दूर है। बीच में दिशा निर्देशों का ध्यान रखते हुए रुकते-रुकाते चलिए। आप हिल ड्राइविंग के रोमांच को महसूस करते हुए आसानी से मसूरी पहुंच जाएंगे। इसी तरह लेंसडोन जाने के लिए पहले कोटद्वार तक 193 किमी. प्लेन रोड पर ड्राइविंग के बाद बस 40 किमी. का हिल रोड है। हिमाचल प्रदेश में स्थित कसौली की दूरी दिल्ली से 303 किमी. है। जबकि उसमें से पहाड़ी रास्ता केवल 36 किमी. होगा। यकीन जानिए इतनी दूरी आप सरलता से तय कर लेंगे।

इन डेस्टिनेशन के मार्ग पर उपलब्ध सुविधाएं और अच्छी सड़कों के कारण यह जरा भी खतरनाक नहीं हैं। दो-तीन बार ऐसे डेस्टिनेशन टच करके आपको अन्य डेस्टिनेशन भी आकर्षित करने लगेंगे। सफर  के कुछ टिप्स भी जरूर जान लीजिए :

रास्ते की जानकारी पहले ही एकत्र कर लें। वैसे आजकल हर जगह मार्ग दर्शक बोर्ड लगे होते हैं। उनका ध्यान रखें। कहीं भ्रम हों तो किसी से पूछ कर आगे बढ़ें।

पहाड़ी डेस्टिनेशन पर जाते समय सामान्य से अतिरिक्त समय लेकर चलें और मार्ग में अतिरिक्त विश्रम करते हुए आगे बढें।

ओवरटेकिंग बिल्कुल न करें तथा गति सीमा 20 किलोमीटर प्रतिघंटा या कम ही रखें, ताकि कभी भी तेजी से ब्रेक न लगाना पड़े। तेज गाड़ी चलाना और फिर अचानक से ब्रेक लगाना समझदारी का काम नहीं है। 

हिल ड्राइविंग में अधिकतर कम गीयर में गाड़ी चलानी होती है। इसलिए उतरते समय या चढ़ते समय गीयर बढ़ाने के लिए बेचैन न हों। जब तक रुकना न हो गाड़ी का इंजन बंद न करें। भले ही गाड़ी ढलान पर हो।

व्यर्थ में हार्न न बजाएं। केवल तिरछे मोड़ों पर हार्न बजाएं।

ड्राइव करते समय केवल सड़क और मोड़ों पर ध्यान दें। प्राकृतिक दृश्यों को निहारने का मन हो तो किसी सुरक्षित स्थान पर गाड़ी रोककर विश्रम करें और मनमोहक दृश्यों को निहारें।

सावधानियां

जाने से कम कम तीन दिन पहले गाड़ी का कम्पलीट चेकअप अवश्य कराएं।
ध्यान रखें अन्य बातों के साथ गाड़ी की बैटरी एवं वाइपर भी ठीक हों।
तिरछा मार्ग, अंधा मोड़, पुलिया आदि के संकेतों का ध्यान रखते हुए सावधानी बरतें।
मदिरापान करके वाहन कभी न चलाएं।
ऊपर चढ़ते वाहन को पहले रास्ता दें। रात्रि में हिल ड्राइविंग न करें।
धुंध हो तो गति सीमा 10 किलोमीटर से अधिक न होनें दें। ताकि जितनी दूरी तक स्पष्ट दिखाई दे रहा है उतनी दूरी में आप ब्रेक लगा सकें। लाइट ऑन रखें एवं खाई की ओर न चलाएं।
जिस स्थान पर ऊपर से पानी गिरता देखें वहां गति धीमी करते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतें। पथरीले मार्ग पर विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है।

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