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10 अरब डॉलर का हो जाएगा देश का जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र

अपने कुशल कर्मियों और अभिनव उत्पादों की बदौलत देश का जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र का वर्ष 2015 तक 10 अरब डॉलर का हो जाएगा।
 
बेंगलूर में आज (भारत जैव 2011) सम्मेलन के उद्घाटन मौके पर कर्नाटक के सूचना और जैव प्रौद्योगिकी सचिव एम एन विद्याशंकर ने कहा कि देश के जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में विकास की असीम संभावनाएं हैं।
 
इस मौके पर अनुसंधान एंव सलाहकार सेवा देने वाली संस्था फ्रास्ट एंड सिलिवान की ओर से जारी रिपोर्ट में भारत को एशिया प्रशांत क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र के चंद बडे प्रमुख केन्द्रों की श्रेणी में शामिल किया गया। भारतीय चिकित्सा परिषद के महानिदेशक डा विश्व मोहन काटोच ने कहा कि कर्नाटक में खासतौर पर जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में तेज विकास हुआ है। इसके लिए वैज्ञानिकों की मेहनत के साथ ही प्रशासन के सहयोगपूर्ण रवैये ने बडी भूमिका अदा की है।

उन्होनें इस मौके पर देश में जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विकास की पूरी कहानी का संक्षित्प पेश करते हुए बताया कि कैसे इस प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल की शुरूआत बीयर और पावरोटी बनाने में किया गया और बाद में आगे बढ़ते हुए इसका इस्तेमाल दवा क्षेत्र में किया जाने लगा।

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