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स्वास्थ्य से खिलवाड़, गरीबों को खिला दी एक्सपायरी दवा

स्वास्थ्य से खिलवाड़, गरीबों को खिला दी एक्सपायरी दवा

गांवों के गरीब मरीजों को सस्ती एवं सर्वसुलभ मेडिकल सर्विस मुहैया कराने के लिए शुरू किए गए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत गरीबों को लाखों रुपए की एक्सपायरी यानी ऐसी दवाएं खिला दी गई जिनकी मियाद पूरी हो चुकी थी।

यह खुलासा स्वास्थ्य मंत्रालय पर लोकलेखा समिति (पीएसी) की 32वीं रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार 2005-2012 तक की केंद्र की इस योजना के तहत उडी़सा के गरीब मरीजों को तीन लाख रुपए से ज्यादा मूल्य की एक्सपायरी दवाएं खिला दी गईं। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि राज्य दवा प्रबंधन इकाई की ओर से दवाओं के एक्सपायर हो जाने की सूचना देर से पहुंची।

इसके अलावा पश्चिम बंगाल और झारखंड में भी मरीजों को घटिया दवाइयां दिए जाने का मामला प्रकाश में आया है। बिहार में तो दवाओं की गुणवत्ता का परीक्षण करने की कोई प्रणाली ही नहीं है। समिति ने अपनी पड़ताल में पाया कि सस्ती सेवा के नाम पर इस मिशन के तहत गरीबों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

छह राज्यों के प्राथमिक स्वास्थ्य केद्रों (पीएचसी) पर दवाएं, गर्भ निरोधक गोलियां तथा टीके नदारद थे। समिति को यह जानकर हैरानी हुई कि जिन पीएचसी का निरीक्षण किया गया उनमें से 69 बिना डॉक्टर के ही संचालित हो रहे थे तथा 15 राज्यों के 11 प्रतिशत पीएचसी में एलोपैथ के डॉक्टर नहीं थे जबकि 28 राज्यों के 86 प्रतिशत केद्रों में आयुष डाक्टरों की कभी नियुक्ति ही नहीं की गई।

वर्ष 2002 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के मुताबिक कुल स्वास्थ्य बजट का 10 प्रतिशत आयुष विभाग के लिए आवंटित किया जाना चाहिए। इन केद्रों पर विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं के बराबर पाए गए।

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